
स्पेशल रिपोर्ट। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है, जिसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 2011 की भर्ती प्रक्रिया से नियुक्त कई सब-इंजीनियर (सिविल) की नियुक्तियां 14 साल बाद रद्द कर दी गई हैं। यह फैसला 3 फरवरी 2026 को बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल) ने दिया।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि
भर्ती का वर्ष और विवरण: वर्ष 2011 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सब-इंजीनियर (सिविल) के 275 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था।
कट-ऑफ डेट: आवेदन की अंतिम तिथि 23 मार्च 2011 थी। नियमों के अनुसार, उम्मीदवारों के पास इस तारीख तक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा या डिग्री अनिवार्य थी।
गड़बड़ी: भर्ती में अनियमितता हुई। कुल 383 उम्मीदवारों को नियुक्ति मिल गई, लेकिन कई के पास कट-ऑफ डेट तक योग्यता नहीं थी। कुछ ने नियुक्ति के बाद डिग्री हासिल की या विभागीय छूट ली।
समस्या: ये लोग पिछले 14 साल से नौकरी कर रहे थे, वेतन ले रहे थे, प्रोबेशन पूरा कर चुके थे और कन्फर्म हो चुके थे।
याचिका और अपील
याचिकाकर्ता: रवि तिवारी ने इस अनियमितता के खिलाफ याचिका दायर की।
सिंगल बेंच: पहले सिंगल बेंच ने याचिका खारिज कर दी।
डिवीजन बेंच अपील: रिट अपील नंबर 661 ऑफ 2025 (रवि तिवारी बनाम स्टेट ऑफ छत्तीसगढ़) में अपील सफल हुई। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट शाल्विक तिवारी ने दलीलें पेश कीं।
याचिकाकर्ता के मुख्य तर्क
विज्ञापन और भर्ती नियमों का सख्त पालन होना चाहिए।
कट-ऑफ डेट के बाद योग्यता हासिल करना या छूट देना गैर-कानूनी है।
“खेल शुरू होने के बाद नियम नहीं बदले जा सकते” (सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला)।
को वारंटो रिट के तहत, यह मायने नहीं रखता कि याचिकाकर्ता कौन है, बल्कि कोई व्यक्ति गलत तरीके से सार्वजनिक पद पर है या नहीं।
सरकार/प्रभावित पक्ष के तर्क
14 साल बीत चुके हैं, सेवा नियमित हो चुकी है।
मानवीय आधार पर राहत दी जाए।
हाईकोर्ट के प्रमुख अवलोकन और फैसला
कोर्ट ने कहा: सहानुभूति कानून से ऊपर नहीं हो सकती।
अगर नियुक्ति की शुरुआत ही अवैध है, तो लंबी सेवा, कन्फर्मेशन या प्रमोशन उसे वैध नहीं बना सकती।
भर्ती नियम सर्वोपरि हैं; कोई अधिकारी कट-ऑफ डेट में ढील नहीं दे सकता।
रद्द की गई नियुक्तियां: प्राइवेट रिस्पॉन्डेंट्स नंबर 4 से 73 तक (करीब 67-70 सब-इंजीनियर) की नियुक्तियां अवैध घोषित। कुल प्रभावित कई हैं (383 में से कई अयोग्य)।
राहत: वर्षा दुबे और अभिषेक भारद्वाज को छूट मिली, क्योंकि उनके पास कट-ऑफ डेट से पहले योग्यता थी।
अन्य निर्देश: हटाए गए कर्मचारियों से पहले दिए गए वेतन की वसूली नहीं होगी (राज्य की गलती भी थी)।
नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से रद्द; उन्हें पद छोड़ना होगा।
प्रभाव और महत्व
यह फैसला छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्तियों के लिए बड़ा संदेश है:
अवैध या बैक-डोर एंट्री बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे कितना समय बीत जाए।
नियमों की अनदेखी से हुई नियुक्तियां कभी भी रद्द हो सकती हैं।
न्याय और पारदर्शिता की जीत मानी जा रही है।
याचिकाकर्ता रवि तिवारी ने कहा: “जो लोग खुद गलत तरीके से सिस्टम में घुसते हैं, वे भ्रष्टाचार बढ़ाते हैं। ग्रामीण विकास विभाग देश की जड़ है, अगर जड़ में भ्रष्टाचार लगा तो देश खोखला हो सकता है।”