- किसान हो जाएंगे तबाह सड़क नहीं मुसीबत है ये: हरेंद्र देव
- 17 जुलाई को प्रदर्शन करेंगे क्षेत्र के किसान
Gulab [editor]
छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव जिले से हैदराबाद तक बन रहे सिक्सलेन हाइवे के खिलाफ दुर्ग जिले के प्रभावित किसानों का गुस्सा फूटने लगा है.
खबर के मुताबिक ग्राम थनौद, अंजोरा, बिरेझर, चंगोरी वासियों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर आंदोलन और धरणा के लिए बड़ी तैयारी की जा रही है.
काम रोकने और मांगों को पूरा करने को लेकर ग्रामीणों ने पर्चा बांट दिया है वही गांव में लाउडस्पीकर के सहारे आंदोलन को तेज करने के लिए गतिविधियां चालू कर दी गई है इधर पुलिस प्रशासन भी चौकन्ना हो गया है, प्रशासनिक चहल-पहल भी तेज हो गई है और शासन प्रशासन सकते में है।
17 जुलाई गुरुवार को ग्राम थनौद के मिनीमाता उद्यान राजा तालाब के पास बड़े पैमाने पर धरना प्रदर्शन ग्रामीण करेंगे.

सीने में गोली खाने हूं तैयार, पूर्व जनपद अध्यक्ष: मोहन हरमुख
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व पूर्व जनपद अध्यक्ष मोहन हरमुख ने कहा कि किसानों को बड़े पैमाने पर समस्या है पुल का हाइट छोटा है जिससे आवाजही में दिक्कत होने लगी है इस मामले को लेकर उन्होंने कहा कि अगर सीने पर गोली भी खानी पड़े तो या आंदोलन नहीं रुकेगा
ग्रामीण अनिल देवांगन ने कहा कि हमें लगभग अंतिम छोर पर 600 मी कॉलम सिस्टम से रोड चाहिए ताकि गांव बाढ़ से ज्यादा प्रभावित न हो हालांकि हर साल गांव में बाढ़ आता है लेकिन पानी जैसे तैसे निकल जाता है यदि कॉलम सिस्टम से रोड नहीं बनेगा तो बाढ़ में डूब कर फसले चौपट ही हो जाएगी किसान फसले ही नहीं ले पाएंगे, किसानों के कृषि यंत्रों को लाने ले जाने में भी असुविधा होगी.
किसानों से जमीन लेकर किसानों के साथ धोखा
जनपद के पूर्व सभापति हरेंद्र देव ने कहा कि सड़क निर्माण के लिए अपना बेशकीमती जमीन किसानों ने दिया है हालांकि उस पर मुआवजा मिला है इसका मतलब यह नहीं है कि आप किसानों के छाती पर खड़ा होकर रोड निर्माण करें अधिकारियों ने भी सही एस्टीमेट के हिसाब से प्रोजेक्ट तैयार नहीं किया है जिसका खामयाजा क्षेत्र के किसानों को भुगतना पड़ रहा है इस रोड निर्माण से किसान तबाह हो जाएंगे हमारी मांगे जब तक पूरी नहीं होगी तब तक धरना प्रदर्शन में बैठेंगे यह लड़ाई जनता के हित का है किसी व्यक्ति विशेष का नहीं आंदोलन को लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है
जानकारी के मुताबिक क्षेत्र के ग्रामीणों ने कई बार इस मुद्दे को मीडिया में उठाया और शासन प्रशासन को भी अवगत कराया है लेकिन प्रशासन की अनदेखी से किसान और ग्रामीण बेहद ही निराश है.
बहुत विवादों से पूरे देश में घिरी ये योजना
जिस तरह से भारतमाला परियोजना के अंतर्गत सड़क निर्माण किया जा रहा है वह राष्ट्रीय स्तर पर विवादों में में तो रही है चाहे मामला मुआवजा देने का हो या सड़क निर्माण में लापरवाही, भ्रष्टाचार का हो या कुछ अन्य भारतमाला परियोजना लगातार विवादों में रही है किसानों से इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण किया गया है लेकिन किसानों की एक नहीं सुनी जा रही है कहीं पर दोगुना मुआवजा है तो कहीं पर चार गुना इस तरीके के भी मामले सामने आए तो वहीं कई अनुविभागीय अधिकारी, कलेक्टर से लेकर पटवारी, राजस्व अधिकारियों तक पर भी इस मामले पर गाज गिरी है ऐसे में देखना होगा कि इस मामले पर क्या प्रशासन कोई निर्णय लेता है आने वाला समय बताएगा.