
दुर्ग विकासखंड के ग्राम पंचायत दमोदा में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के ऑनलाइन सर्वे को लेकर खड़ा विवाद अब और गहरा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कंप्यूटर ऑपरेटर भेषवरी साहू ने सर्वे में गड़बड़ी की, जिससे कई पात्र गरीब परिवार लाभार्थी सूची से छूट गए। इस मामले में ग्रामीणों ने जनपद पंचायत स्तर पर सीधे शिकायत दर्ज कराई, जहां एक अनोखा और संवेदनशील दृश्य देखने को मिला।
ग्रामीणों का जनपद तक पहुंचना
ग्रामीणों ने बताया कि वे अपनी समस्या लेकर ट्रैक्टर में सवार होकर जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचे। महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों का बड़ा समूह इंतजार करता रहा। जब वे कार्यालय के अंदर पहुंचे, तो जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी CEO रूपेश पांडेय ने जमीन पर ही बैठकर ग्रामीणों, खासकर महिलाओं की समस्याएं सुनीं। उन्होंने गहनता से शिकायतों को समझा और कार्रवाई का भरोसा दिलाया। यह संवेदनशील रवैया ग्रामीणों के बीच काफी सराहा गया।
क्या है पूरा मामला?
30 जनवरी 2026 को ग्राम सभा की बैठक में PMAY-G के तहत ऑनलाइन सर्वे की जानकारी मांगी गई।
ग्रामीणों के अनुसार:
सचिव/ऑपरेटर ने पहले ग्रामीणों को गुमराह किया कि गांव में सर्वे सूची नहीं है।
बाद में केवल 10-15 परिवारों के नाम बताए गए, जबकि कई गरीब परिवार छूट गए।
कोई मुनादी (सार्वजनिक घोषणा) नहीं की गई, जिससे प्रभावित परिवारों को जानकारी नहीं मिली।
घर-घर सर्वे करने वाली कंप्यूटर ऑपरेटर से पूछने पर भी गलत जानकारी दी गई, जैसे आधार कार्ड सत्यापित नहीं होने का बहाना।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी गड़बड़ी ऑपरेटर की ओर से हुई, जिससे पात्र परिवार वंचित रह गए।
इसके विरोध में ग्रामीणों ने एक आवेदन तैयार किया, जिसमें लगभग 75 ग्रामीणों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान हैं।
आवेदन में मांग की गई है कि:
भेषवरी साहू (कंप्यूटर ऑपरेटर) को पद से हटाया जाए।
सर्वे की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से दोबारा कराई जाए।
वंचित परिवारों को सूची में शामिल किया जाए।
यह आवेदन उच्च अधिकारियों को भेजा गया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पिछला संदर्भ
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले 29 नवंबर 2024 को ग्राम पंचायत की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था कि भेषवरी साहू का कार्य संतोषजनक नहीं है, इसलिए उन्हें हटाया जाए। लेकिन उच्च अधिकारी स्तर पर आज तक कोई निर्णय नहीं लिया गया, जो ग्राम सभा के प्रस्ताव का उल्लंघन है।
ग्रामीणों की मांग और उम्मीद
तत्काल जांच हो।
ऑपरेटर को हटाकर नया सर्वे कराया जाए।
सभी पात्र परिवारों को PMAY-G का लाभ मिले।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार जल्द कार्रवाई हो।
यह मामला PMAY-G जैसी महत्वपूर्ण योजना में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी को उजागर करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वे की प्रक्रिया अक्सर विवादों का शिकार हो जाती है, लेकिन अधिकारी का जमीन पर बैठकर सुनना एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन से अब त्वरित और ठोस कार्रवाई की उम्मीद है।