
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों भारत स्काउट्स एंड गाइड्स को लेकर तूफान खड़ा हो गया है। एक तरफ रायपुर के सांसद और दिग्गज भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल हैं, जो खुद को संगठन का वैधानिक राज्य अध्यक्ष बता रहे हैं। दूसरी तरफ स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का खेमा, जो दावा कर रहा है कि 13 दिसंबर 2025 को जारी आदेश से मंत्री जी को पदेन अध्यक्ष बना दिया गया है।
मसाला तो तब और बढ़ गया जब बालोद में 9 जनवरी 2026 से शुरू होने वाली राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी को लेकर बृजमोहन ने बम फोड़ा – “जंबूरी के नाम पर भारी भ्रष्टाचार हुआ है, इसलिए आयोजन तत्काल स्थगित!” यह ऐलान 5 जनवरी 2026 को हुई राज्य परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया, जिसमें बृजमोहन खुद अध्यक्षता कर रहे थे।
बृजमोहन खेमे के गंभीर आरोप: 10 करोड़ का खेल और नियमों की धज्जियां!
पहले तो परिषद ने जंबूरी नया रायपुर में करने का फैसला किया था, लेकिन बिना अनुमति के स्कूल शिक्षा विभाग ने जगह बदलकर बालोद कर दी – संविधान का उल्लंघन!
सबसे बड़ा बम: वित्त विभाग से स्वीकृत 10 करोड़ रुपये की राशि स्काउट्स एंड गाइड्स के खाते में जाने की बजाय सीधे जिला शिक्षा अधिकारी बालोद के खाते में ट्रांसफर! इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया गया।
टेंडर प्रक्रिया पर सवाल, प्रशासनिक विवाद और विभागीय दखलंदाजी – सब पर बृजमोहन ने चुटकी लेते हुए कहा कि संगठन स्वायत्त है, विभागीय आदेश से नहीं चलता।
बोनस पॉइंट: बृजमोहन ने साफ कहा – “मैंने इस्तीफा नहीं दिया, मैं ही अध्यक्ष हूं!” अगर जंबूरी फिर भी हुई तो पूरी जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग की होगी।
मंत्री गजेंद्र यादव का पलटवार: “कांग्रेसी बदनाम कर रहे, सब पारदर्शी है!”
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा – “पूरी पारदर्शिता के साथ काम हो रहा है। देशभर के बच्चे छत्तीसगढ़ आ रहे हैं, बेवजह राज्य का नाम खराब न करें।” उन्होंने सीधे कांग्रेस पर निशाना साधा कि विपक्ष सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। स्कूल विभाग के अफसरों ने भी साफ कहा – “जंबूरी स्थगित नहीं हुई, तैयारी जारी है!”
बैकग्राउंड ड्रामा: दोनों भाजपा के, लेकिन खेमेबाजी साफ!
सांसद बृजमोहन अग्रवाल लंबे समय से छत्तीसगढ़ भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के राज्य अध्यक्ष हैं। हालांकि, हाल के विवाद में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक आदेश (13 दिसंबर 2025) के आधार पर मंत्री गजेंद्र यादव को पदेन अध्यक्ष बताया जा रहा है, लेकिन बृजमोहन अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया और वे ही वैधानिक रूप से अध्यक्ष बने हुए हैं। (नोट: 2024 में वे इस पद पर थे, जब वे शिक्षा मंत्री थे।)
गजेंद्र यादव नए मंत्री हैं (2025 में कैबिनेट में शामिल), स्काउट्स गाइड्स से पुराना नाता – RSS बैकग्राउंड और पहले भी योगदान।
दोनों भाजपा के, लेकिन साफ है कि संगठन पर कंट्रोल की लड़ाई है। एक तरफ पुराने दिग्गज सांसद, दूसरी तरफ नए मंत्री और विभाग का दबदबा।
अब क्या होगा?
जंबूरी टल गई या नहीं, यह तो आने वाले दिन बताएंगे। लेकिन यह विवाद छत्तीसगढ़ भाजपा की अंदरूनी खींचतान को उजागर कर रहा है। बच्चे, युवा और स्काउटिंग का भविष्य दांव पर, जबकि सियासी दिग्गज कुर्सी और आरोपों की जंग लड़ रहे हैं।
क्या यह सिर्फ भ्रष्टाचार का मामला है या संगठन पर कब्जे की लड़ाई? जनता देख रही है – मसाला तो भरपूर है! आगे क्या ट्विस्ट आएगा, इंतजार कीजिए…