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छत्तीसगढ़ में सुशासन की ‘गारंटीड’ हड़ताल: मोदी जी की वारंटी में क्या ‘स्ट्राइक प्रूफ’ नहीं था?, कम काम ज्यादा आराम….

रायपुर, 29 दिसंबर 2025 – आज का दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने वाला है! जहां एक तरफ पूरा प्रदेश भाजपा सरकार के ‘सुशासन’ की मिसाल दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के सरकारी कर्मचारी और अधिकारी तीन दिवसीय पेन-डाउन हड़ताल पर उतर आए हैं। जी हां, आपने सही पढ़ा – सुशासन इतना मजबूत है कि अब कर्मचारी खुद ही ‘आराम’ करने लगे हैं। क्या यह मोदी जी की गारंटी का नया अवतार है, जहां ‘काम’ की बजाय ‘हड़ताल’ की गारंटी मिल रही है?

भाजपा की ‘मोदी की गारंटी’ मेनिफेस्टो को याद कीजिए, जो 2023 के चुनाव में छत्तीसगढ़ को सुशासन का सूर्योदय दिखाने का वादा कर रही थी। गैस सिलेंडर 500 रुपये में, एक लाख युवाओं को नौकरियां, और बुजुर्गों के इलाज की गारंटी। लेकिन लगता है, इस गारंटी में सरकारी कर्मचारियों की मांगों का कोई क्लॉज नहीं था। कर्मचारी फेडरेशन ने कहा है कि पुरानी पेंशन स्कीम, महंगाई भत्ता, और अन्य मांगों पर सरकार ‘सुशासन’ के नाम पर चुप्पी साधे बैठी है। नतीजा? आज से 31 दिसंबर तक सारा सरकारी काम ठप!

 सुशासन की यह मिसाल देखिए: अभी कुछ दिन पहले 25 दिसंबर को ‘गुड गवर्नेंस डे’ मनाया गया, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने देश को सुशासन का संदेश दिया। अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मतिथि पर यह दिन मनाया जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में सुशासन इतना ‘गुड’ हो गया कि कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। क्या यह सुशासन की नई परिभाषा है – जहां अधिकारी पेन डाउन कर दें, और सरकार कहे, “सब ठीक है, मोदी की गारंटी है!”

समाचार पत्रों और कई न्यूज वेबसाइट्स पर छपी खबरों के मुताबिक, यह हड़ताल पूरे राज्य में सरकारी दफ्तरों को लकवा मारने वाली है। एक प्रमुख पोर्टल ने लिखा, “कर्मचारी- अधिकारी फेडरेशन ने 29 से 31 दिसंबर तक हड़ताल की घोषणा की है, जिससे सरकारी कामकाज रुक जाएगा।” लेकिन भाजपा के प्रवक्ता शायद कहेंगे, “यह सुशासन का हिस्सा है – कम काम, ज्यादा आराम!” और मोदी जी की गारंटी? वह तो ‘सनराइज ऑफ गुड गवर्नेंस’ का वादा थी, लेकिन लगता है सूरज हड़ताल की वजह से छिप गया।

पिछले महीनों में भी छत्तीसगढ़ में सुशासन की झलक दिखी थी – NHM के 14,000 से ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने सितंबर में हड़ताल की, जिसके बाद इस्तीफे दिए गए। सरकार ने 25 नेताओं को बर्खास्त कर दिया, लेकिन फिर बातचीत से मामला सुलझा। क्या यह सुशासन की रणनीति है? हड़ताल कराओ, फिर गारंटी देकर सुलझाओ!

 जनता पूछ रही है: मोदी जी, आपकी गारंटी में क्या ‘हड़ताल वारंटी’ शामिल है? या सुशासन का मतलब अब ‘साइलेंट गवर्नेंस’ हो गया है? खैर, छत्तीसगढ़ के लोग इंतजार कर रहे हैं – शायद अगली गारंटी में ‘हड़ताल फ्री’ प्रदेश का वादा हो। तब तक, सुशासन जिंदाबाद!

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Author: dhaaranews

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