
(गुलाब देशमुख). दुर्ग जिले की पंचायतों व स्थानीय निकायों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आमजन को सस्ता भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित गढ़ कलेवा के टेंडर प्रक्रिया में बड़े खेल का खुलासा हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता जैनेंद्र कुमार ने आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर गंभीर अनियमितताएं उजागर की हैं। उनके अनुसार, 100 रुपये के स्टांप की शर्त और 10 के टिकट पर मंजूरी जैसे प्रावधानों से टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता जैनेंद्र कुमार को मिले दस्तावेजों के अनुसार, टेंडर शर्तों में स्पष्ट उल्लेख था कि आवेदक समूह को 100 रुपये के स्टांप पेपर पर शपथ पत्र देना अनिवार्य होगा। जहां अन्य समूहों ने इस शर्त का पालन किया, वहीं सिद्धि स्व सहायता समूह ने मात्र 10 रुपये के नोटरी टिकट पर तैयार दस्तावेज प्रस्तुत किया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस दस्तावेज पर न तो आवेदक के हस्ताक्षर हैं न गवाहों के और उसे स्वीकार कर लिया गया।
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांचकर्ताओं की जांच रिपोर्ट में तय दरों से अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी में हो रही इस अतिरिक्त वसूली ने पूरे संचालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

टेंडर समिति की भूमिका सवालों में: मामले में टेंडर समिति के सदस्य पीतांबर यादव, लेखाधिकारी कुलदीप देवांगन और उपसंचालक आकाश सोनी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरटीआई कार्यकर्ता ने कठोर कार्रवाई की मांग की है उन्होंनें कहा कि जिला पंचायत एक सार्वजनिक संस्था है। सार्वजनिक धन से संचालित योजना में पारदर्शिता अनिवार्य है। किसी समूह को यहां निजता का अधिकार नहीं दिया जा सकता। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बजरंग दुबे, सीईओ, जिला पंचायत दुर्ग ने कहा कि पूर्व संचालकों की शिकायत पर जांच की गई थी। दस्तावेजों की जांच और टेंडर समिति की अनुशंसा के आधार पर समूह को टेंडर दिया गया। यदि कोई जांच में तथ्य मिलते हैं तो जरूर कार्रवाई होगी।
उक्त मामला प्रमुख समाचार पत्र पत्रिका ने गढ़ कलेवा टेंडर प्रक्रिया में शनिवार सुबह अनियमितताओं का खुलासा किया गया है। गढ़ कलेवा छत्तीसगढ़ की पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजना है, जो महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित की जाती है। इस मामले में पारदर्शिता की कमी और नियमों के उल्लंघन के आरोप गंभीर हैं, जिससे योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।








