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दुर्ग ग्रामीण विधानसभा में अपराध की बाढ़: हत्या के प्रयास, मारपीट और नशीली गोलियों की बिक्री से बढ़ रही हिंसा, कानून का राज हुआ खत्म

दुर्ग, 09 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ के दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में अपराध की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। छोटी रंजिशें जानलेवा हमलों में बदल रही हैं, जबकि कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। हाल की घटनाओं से पता चलता है कि क्षेत्र में उत्तेजक नशीली गोलियों (जैसे कामाग्रा, सिल्डेनाफिल युक्त टैबलेट्स) की अवैध बिक्री बड़ी मात्रा में हो रही है, जो लोगों में आक्रामकता बढ़ाकर हिंसक वारदातों को जन्म दे रही है। ये गोलियां बिना प्रिस्क्रिप्शन आसानी से उपलब्ध हैं और इनके दुरुपयोग से युवाओं में गुस्सा, भ्रम और हिंसक व्यवहार बढ़ रहा है। भाजपा विधायक ललित चंद्राकर की दबंग छवि भी अपराधियों पर लगाम नहीं लगा पा रही है। नेवई , पुलगांव और उतई, पद्मनाभपूर, अंडा जैसे थाना क्षेत्रों में अपराध चरम पर हैं, जहां रोजाना मारपीट और हिट एंड रन, चाकुओं, कटर से जानलेवा हमले हो रहे हैं। पूरे दुर्ग जिले में कानून का राज खत्म होता नजर आ रहा है। हाल ही में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने दो पुलिस निरीक्षक अंडा और नेवई का ट्रांसफर किया है उसके बाद भी अपराधी अपराध करने से नहीं चुक रहे हैं.
नशीली उत्तेजक गोलियों की बिक्री अपराध का बड़ा कारण
स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में वियाग्रा जैसी उत्तेजक गोलियों (सिल्डेनाफिल साइट्रेट युक्त) की अवैध बिक्री तेजी से बढ़ी है। ये गोलियां बिना डॉक्टरी सलाह के केमिस्ट शॉप्स पर आसानी से मिल रही हैं, जिससे युवा इनका दुरुपयोग कर रहे हैं। इनके साइड इफेक्ट्स में सिरदर्द, चक्कर, आक्रामकता और भ्रम शामिल हैं, जो छोटी बातों पर बड़े झगड़ों और हिंसक हमलों का कारण बन रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन गोलियों का ओवरडोज गुस्सा बढ़ाता है और हिंसा को ट्रिगर करता है। दुर्ग ग्रामीण में कई वारदातों के पीछे इसी तरह की नशीली गोलियों का सेवन बताया जा रहा है, जो अपराध की जड़ बन रही है।
पहली घटना 8 जनवरी की शाम की है। स्टेशन मरौदा नेवई निवासी एक वेल्डर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि वह अपने दोस्तों हिमांशु पाण्डेय और टिकेश्वर साहू के साथ दादू चाय दुकान पर चाय पी रहा था। तभी हिमांशु साहू पुरानी रंजिश के चलते आया और गाली-गलौज करते हुए हिमांशु पाण्डेय पर कटर से हमला कर दिया। हमले में पीड़ित की गर्दन और पीठ पर गंभीर चोटें आईं। अगर वह बचाव न करता तो उसकी जान जा सकती थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बीच-बचाव किया, जिसके बाद आरोपी फरार हो गया। सूत्रों के अनुसार, इस हमले का मुख्य कारण उत्तेजक नशीली गोली ‘नाइट्रोट्रेन’ जैसी दवाओं का सेवन था, जो आरोपी में आक्रामकता पैदा कर रहा था।


दूसरी घटना 7 जनवरी की रात की है। उतई पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, जोरातराई मिलन चौक निवासी गृहिणी स्वाति जाल के घर के सामने सगी बहनों गायत्री साहू और निर्मला विश्वकर्मा आईं और उसे बाहर बुलाया। गायत्री ने अपने पति अमन साहू से लिए रुपए वापस मांगे। स्वाति ने कहा कि अभी पैसे नहीं हैं, बाद में दे दूंगी। इस पर गायत्री ने स्वाति पर पति से चक्कर चलाने का आरोप लगाया और बातचीत बंद करने को कहा। दोनों बहनों ने गाली-गलौज की और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देते हुए हाथ-पैर से मारपीट की, जिसमें स्वाति को चोटें आईं। उतई पुलिस ने दोनों महिलाओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 296, 3(5), 351(3) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
ये घटनाएं दुर्ग ग्रामीण में बढ़ती हिंसा और नशीली गोलियों के दुरुपयोग का सबूत हैं। राज्य में NDPS एक्ट के तहत मामले बढ़ रहे हैं, और दुर्ग जैसे जिलों में सिंथेटिक ड्रग्स और फार्मास्यूटिकल दवाओं का अवैध कारोबार चिंता का विषय है।
दुर्ग ग्रामीण से भाजपा विधायक ललित चंद्राकर 2023 में जीते थे और अपनी दबंग छवि के लिए जाने जाते हैं। लेकिन अपराध और नशीली दवाओं की बिक्री पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोग कहते हैं कि थानों में शिकायत के बावजूद कार्रवाई धीमी है और अपराधी बेखौफ हैं।
निवासियों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही और राजनीतिक दखल से अपराधी नहीं डरते। नशीली गोलियों की बिक्री पर सख्ती और अपराधियों पर नकेल जरूरी है, वरना स्थिति और बिगड़ेगी। प्रशासन से मांग है कि कानून व्यवस्था दुरुस्त की जाए और अवैध दवा कारोबार पर रोक लगाई जाए।

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Author: dhaaranews

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