
अहिवारा विधानसभा क्षेत्र (छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित) के खेतों में अवैध खनन की गतिविधियां जोरों पर चल रही हैं, जिसकी ताजा तस्वीरें सामने आई हैं। उपयोगकर्ता द्वारा साझा की गई फोटोज में एक वोल्वो ब्रांड की बड़ी एक्सकेवेटर (खुदाई मशीन) दिख रही है, जो सूखे खेतों और घास-फूस से भरे इलाके में काम कर रही है। मशीन के ऑपरेटर कैबिन में बैठे व्यक्ति के साथ धुंध भरी सुबह का माहौल और आसपास के पेड़-पौधे स्पष्ट नजर आ रहे हैं। एक फोटो सड़क से खींची गई लगती है, जहां मशीन दूर खड़ी है और खेतों में गड्ढे बनते दिख रहे हैं।
ग्राम पंचायत ढौर के सरपंच ने इस मामले पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि भू-माफिया स्थानीय भोले-भाले किसानों को अपने जाल में फंसा रहे हैं और बिना किसी वैध अनुमति के बड़े पैमाने पर अवैध खनन (संभवतः मुरुम, रेत या मिट्टी का) कर रहे हैं। सरपंच के अनुसार, यह कार्य ग्राम पंचायत के किसी प्रस्ताव या अनुमति के बिना हो रहा है, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

अवैध खनन से हो रहे नुकसान
शासन को राजस्व की भारी क्षति: बिना पट्टे या रजिस्ट्री के खनन से सरकार को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
किसानों के खेतों को नुकसान: खुदाई से आसपास के खेतों की मिट्टी उखड़ रही है, जिससे फसलें प्रभावित हो रही हैं और भूमि की उर्वरता घट रही है।
गांव की सड़कों का बुरा हाल: भारी मशीनों और ट्रकों के आवागमन से ग्रामीण सड़कें टूट-फूट रही हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी हो रही है।
पर्यावरणीय प्रभाव: बड़े पैमाने पर खुदाई से धूल-मिट्टी उड़ रही है, जो स्थानीय पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
यह क्षेत्र विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा (भाजपा) का है। सरपंच ने तत्काल प्रशासन से *मांग की है कि:*
अवैध खनन गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाई जाए।
भू-माफियाओं और शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
बड़ी मशीनों (जैसे एक्सकेवेटर) के उपयोग पर निगरानी बढ़ाई जाए।
पृष्ठभूमि और समान मामले
अहिवारा विधानसभा क्षेत्र में अवैध खनन (खासकर मुरुम और गौण खनिजों का) कोई नई समस्या नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में यहां के विभिन्न गांवों (जैसे गिरहोला, नारधा-मुड़पार आदि) में ग्रामीणों ने प्रशासन को शिकायतें दी हैं, ज्ञापन सौंपे हैं और जनदर्शन में पहुंचकर माफिया के खिलाफ आवाज उठाई है। कुछ मामलों में प्रशासन ने कार्रवाई भी की है, लेकिन समस्या बार-बार उभर रही है। क्षेत्र में प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत के आरोप भी लगते रहे हैं।
यह मामला छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध खनन के व्यापक मुद्दे का हिस्सा लगता है, जहां माफिया संगठित तरीके से काम कर रहे हैं। सरपंच की मांग के अनुसार, स्थानीय प्रशासन (जिला कलेक्टर, खनिज विभाग और पुलिस) को त्वरित जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि किसानों और गांव की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।