
छत्तीसगढ़ : में बहुचर्चित सोलर स्ट्रीट लाइट घोटाले की जांच अब 18 महीने से अधिक समय से चल रही है, लेकिन सच्चाई अभी भी सामने नहीं आई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में लगातार फटकार लगाई है, पर विधानसभा की जांच समिति की रिपोर्ट सितंबर 2025 के बाद भी कोर्ट में नहीं पहुंची है
घोटाले का मूल मामला
यह घोटाला मुख्य रूप से 2021-2023 के दौरान पूर्व कांग्रेस सरकार के समय प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना और अन्य योजनाओं के तहत ग्रामीण/आदिवासी क्षेत्रों में सोलर स्ट्रीट लाइट्स की खरीद और स्थापना से जुड़ा है। मुख्य आरोप:
ओवर-प्राइसिंग: प्रति लाइट 47,600 रुपये की दर से खरीद, जबकि बाजार दर कम बताई जाती है।
घटिया गुणवत्ता: कई लाइट्स जल्दी खराब हो गईं या अधूरी रहीं।
प्रक्रिया में गड़बड़ी: बिना उचित टेंडर, जांच या CREDA (छत्तीसगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी) की मंजूरी के काम हुआ।
बड़े पैमाने पर खर्च: बस्तर संभाग (बस्तर, सुकमा, कोंडागांव, कांकेर) में 3,620+ लाइट्स पर 17.23 करोड़ रुपये खर्च, कुल अनुमानित राशि 100 करोड़ से अधिक। जांजगीर-चांपा जैसे अन्य जिलों में भी समान अनियमितताएं।
जांच की शुरुआत और राजनीतिक बहस
जुलाई 2024: विधानसभा के मानसून सत्र में कोंडागांव की भाजपा विधायक लता उसेंडी ने आदिवासी विकास मंत्री रामविचार नेताम से सवाल उठाया। RTI से मिली जानकारी के आधार पर आरोप लगाए गए कि आरईएस (Rural Electrification Service) के इंजीनियर दोषी पाए गए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
मंत्री ने पूरे प्रदेश में 2021-2024 की खरीद की जांच विधानसभा समिति से कराने की घोषणा की। समिति 6 अगस्त 2024 को गठित हुई।
हाईकोर्ट का दखल और सख्ती
दिसंबर 2024 : मीडिया रिपोर्ट (ओवर-प्राइसिंग और फंड दुरुपयोग) पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान (suo motu) लिया और जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की।
जनवरी-मार्च 2025: ऊर्जा विभाग के सचिव और चेयरमैन ने हलफनामा पेश किया, लेकिन कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ। बस्तर क्षेत्र की रिपोर्ट मांगी गई।
जुलाई 2025: मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की बेंच ने समिति से सितंबर 2025 तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। महाधिवक्ता ने बताया कि रिपोर्ट तैयार नहीं हुई।
फरवरी 2026 तक: 11 महीने बीत चुके हैं, लेकिन रिपोर्ट अभी भी नहीं आई। सुनवाई आगे बढ़ी है, और कोर्ट ने शपथ-पत्र के साथ रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। कोई नया फाइनल निष्कर्ष या बड़ी कार्रवाई सार्वजनिक नहीं हुई।
अब तक की कार्रवाई
कुछ स्थानीय स्तर पर FIR, निलंबन और गिरफ्तारियां हुईं, जैसे:
कोंडागांव में प्रभारी प्रोजेक्ट एडमिनिस्ट्रेटर संकल्प साहू निलंबित।
कांकेर में जनपद CEO, टैक्स अधिकारी इंद्र कुमार ध्रुव और कुछ कांग्रेसी नेता गिरफ्तार (फर्जी वर्क ऑर्डर से जुड़े)।
आरईएस के तत्कालीन एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) को दोषी पाया गया, लेकिन नाम सार्वजनिक नहीं और कार्रवाई अधूरी।
बड़े अफसरों या ठेकेदारों पर कोई ठोस एक्शन नहीं आया।
यह मामला ग्रामीण विकास को प्रभावित कर रहा है, जहां कई गांवों में सोलर लाइट्स खराब पड़ी हैं। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन जांच की धीमी गति से सवाल उठ रहे हैं। हाईकोर्ट की निगरानी में प्रक्रिया चल रही है—अगली सुनवाई या रिपोर्ट आने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।








