दुर्ग। भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के आगामी संगठनात्मक चुनावों को लेकर दुर्ग ग्रामीण जिले में राजनीतिक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। चार साल बाद एक बार फिर युवा कांग्रेस की राजनीति के दो चर्चित चेहरे अमन सिंह और जयंत देशमुख संभावित रूप से आमने-सामने आ सकते हैं।
हालांकि अभी आधिकारिक प्रत्याशियों की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संगठन के भीतर चल रही चर्चाओं और सदस्यता अभियान की तैयारियों ने चुनावी माहौल बना दिया है।
भारतीय युवा कांग्रेस पिछले कई वर्षों से संगठनात्मक चुनावों को सदस्यता आधारित और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत कराने का दावा करती रही है। संगठन की आधिकारिक चुनाव प्रणाली में ऑनलाइन सदस्यता, डिजिटल सत्यापन और वोटिंग प्रक्रिया को शामिल किया गया है। युवा कांग्रेस चुनाव प्राधिकरण (YCEA) तथा IYC की ओर से विभिन्न राज्यों में इसी मॉडल के तहत चुनावी प्रक्रियाएं संचालित की जा रही हैं।
प्रत्येक सदस्य की सदस्यता शुल्क 75 रुपये निर्धारित किया गया है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश स्तर पर जिला अध्यक्ष पद सहित विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियों के लिए संभावित दावेदारों के इंटरव्यू भी लिए गए हैं। हालांकि कांग्रेस संगठन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है।
पिछली बार क्या रहा था समीकरण
युवा कांग्रेस के पिछले संगठनात्मक चुनाव में वर्तमान युवा जिला अध्यक्ष जयंत देशमुख को लगभग 13 हजार से अधिक मत मिले थे की चर्चा संगठन के भीतर रही थी, जिसके आधार पर वे जिला अध्यक्ष पद तक पहुंचे थे। वहीं अमन सिंह को लगभग 7 से 8 हजार मत प्राप्त हुए थे और उन्हें उपाध्यक्ष पद से संतोष करना पड़ा था। इन आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन संगठन से जुड़े कई कार्यकर्ता इन्हें पिछले चुनाव का प्रमुख राजनीतिक संदर्भ मानते हैं।
इस बार बदलते दिख रहे हैं समीकरण
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पिछली बार जहां अमन सिंह को तत्कालीन मंत्रियों गुरु रुद्र कुमार और ताम्रध्वज साहू के समर्थन की बातें सामने आई थीं, व जयंत देशमुख के प्रति एक बड़े नेता की मौन सहमति की चर्चाएं भी चली थीं।
वर्तमान परिस्थितियों में युवा कांग्रेस और कांग्रेस संगठन के कई कार्यकर्ता मानते हैं कि अमन सिंह को कुछ नए युवा चेहरों का समर्थन मिल सकता है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक भिलाई विधायक देवेंद्र यादव एवं दो पूर्व मंत्री का नाम भी अमन सिंह के समर्थन की संभावित चर्चाओं में लिया जा रहा है, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
दूसरी ओर जयंत देशमुख के बारे में चर्चा है कि उन्हें इस बार अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्र राजनीतिक लड़ाई लड़नी पड़ सकती है। संगठन के अंदरूनी समीकरणों को देखने वाले कार्यकर्ताओं का मानना है कि उनके सामने चुनौती पिछली बार की तुलना में अधिक कठिन हो सकती है।
राहुल गांधी के लोकतांत्रिक मॉडल की फिर परीक्षा
भारतीय युवा कांग्रेस की चुनाव प्रणाली को राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए आंतरिक लोकतांत्रिक सुधारों का हिस्सा माना जाता है। संगठन का दावा है कि सदस्यता और चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से नामांकन आधारित राजनीति के बजाय कार्यकर्ताओं को सीधे नेतृत्व चुनने का अवसर दिया जाता है। सदस्यता, डिजिटल पंजीकरण और मतदान की व्यवस्था इसी मॉडल का हिस्सा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दुर्ग ग्रामीण में अमन सिंह और जयंत देशमुख के बीच मुकाबला होता है तो यह केवल दो नेताओं की लड़ाई नहीं होगी, बल्कि संगठन के भीतर मौजूद विभिन्न राजनीतिक धाराओं और युवा नेतृत्व की स्वीकार्यता की भी परीक्षा होगी।
सदस्यता अभियान से तय होगी असली ताकत
युवा कांग्रेस का महा सदस्यता अभियान जल्द शुरू होने की संभावना है। संगठनात्मक चुनावों में सदस्य संख्या और सक्रिय वोटर आधार सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों संभावित खेमों का पूरा फोकस नए सदस्यों को जोड़ने और संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने पर रहेगा।
फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि दुर्ग ग्रामीण युवा कांग्रेस की राजनीति में चार साल बाद एक बार फिर बड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संगठन के अंदर चल रही चर्चाएं वास्तविक चुनावी परिणामों में बदलती हैं या फिर अंतिम समय में कोई नया समीकरण उभरकर सामने आता है।







