रविशंकर स्टेडियम परियोजना पर उठे बड़े सवाल, भू-अर्जन मामलों में हाईकोर्ट की सख्ती के बीच प्रशासन की नई कवायद
दुर्ग। एक ओर दुर्ग प्रशासन पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के रूप में विकसित करने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को 33 वर्षों की लीज पर देने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भूमि और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है।
हाल ही में भूमि अर्जन से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए दुर्ग कलेक्टर और भू-अर्जन अधिकारी को तलब किया है तथा शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में प्रशासन की कार्यप्रणाली और प्रस्तावित स्टेडियम परियोजना को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
जिला क्रीड़ांगन समिति की बैठक में रविशंकर शुक्ल स्टेडियम और मानस भवन को जर्जर घोषित कर अपलेखन का निर्णय लिया गया है। साथ ही स्टेडियम परिसर में संचालित दुकानों, गुमटियों और अन्य संरचनाओं को हटाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने की बात कही गई है।
लेकिन शहर के बीच स्थित इस स्टेडियम को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम के लिए हजारों दर्शकों की क्षमता, बड़ी पार्किंग व्यवस्था, वीआईपी मूवमेंट, मीडिया सेंटर, प्रसारण सुविधाएं और सुरक्षा मानकों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में रविशंकर स्टेडियम चारों ओर से सड़क, संस्थानों, बाजार और घनी आबादी से घिरा हुआ है।

सबसे बड़ा सवाल पार्किंग को लेकर उठ रहा है। यदि भविष्य में यहां अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित होते हैं तो हजारों वाहनों की पार्किंग कहां होगी? मैच के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन कैसे होगा? क्या आसपास अतिरिक्त भूमि उपलब्ध है या फिर भविष्य में और भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता पड़ेगी?
यही कारण है कि स्टेडियम परियोजना की घोषणा के साथ-साथ भूमि प्रबंधन और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। भू-अर्जन मामलों में हाईकोर्ट द्वारा दिखाई गई सख्ती के बाद अब लोग यह जानना चाहते हैं कि प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम परियोजना के लिए सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं कितनी पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएंगी।
खेल प्रेमियों का मानना है कि यदि परियोजना सफल होती है तो दुर्ग राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर बड़ी पहचान बना सकता है। वहीं आलोचकों का कहना है कि बीसीसीआई को 33 वर्षों की लीज देने की घोषणा से पहले भूमि, पार्किंग, यातायात, पर्यावरण और शहर की आधारभूत संरचना से जुड़े प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर सामने आना चाहिए।
फिलहाल प्रशासन इसे दुर्ग के विकास का बड़ा कदम बता रहा है, लेकिन जमीन पर इसकी व्यवहारिकता, उपलब्ध भूमि, पार्किंग व्यवस्था और बीसीसीआई की अंतिम स्वीकृति जैसे कई प्रश्न अभी भी अनुत्तरित हैं।








