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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: समय पर नियुक्ति नहीं तो MBBS सेवा बांड स्वतः होगा समाप्त

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के एमबीबीएस मेडिकल ग्रेजुएट्स को हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ मेडिकल, डेंटल एवं फिजियोथैरेपी अंडर ग्रेजुएट प्रवेश नियम, 2025 के तहत निर्धारित समय-सीमा के भीतर नियुक्ति आदेश जारी नहीं करती, तो छात्रों द्वारा निष्पादित अनिवार्य सेवा बांड स्वतः समाप्त माना जाएगा।

MBBS छात्रों ने हाईकोर्ट का लिया था दरवाजा

यह मामला वर्ष 2025 में सिम्स, बिलासपुर से एमबीबीएस और अनिवार्य रोटेटिंग इंटर्नशिप पूरी करने वाले नितीन कुमार सिंह, साहिल करी, चंद्र प्रकाश रवि और साक्षी कंवर द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा है। मामले की सुनवाई जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ ने की।

NOC नहीं मिलने को दी थी चुनौती

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य सरकार ने छह माह की वैधानिक अवधि के भीतर नियुक्ति आदेश जारी नहीं किया, फिर भी उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देने से इनकार कर दिया गया। उन्होंने नियम 10(6) का हवाला देते हुए दलील दी कि तय समय में नियुक्ति नहीं होने पर सेवा बांड स्वतः समाप्त हो जाता है, इसलिए उन्हें बांड के आधार पर रोका नहीं जा सकता।

सरकार ने किया याचिका का विरोध

राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि सभी याचिकाकर्ता प्रवेश के समय किए गए सेवा बांड से बंधे हुए हैं और उन्हें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवा देना अनिवार्य है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि याचिकाकर्ता काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल हुए थे और बाद में उनके नियुक्ति आदेश भी जारी किए गए थे, इसलिए बांड की शर्तें प्रभावी बनी हुई हैं।

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Author: Dhaara News

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