दुर्ग। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने झम्मन साहू बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य मामले में स्टेडियम परिसर के दुकानदारों को बड़ी राहत देते हुए जिला प्रशासन को अगले चार माह तक किसी भी प्रकार की बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। साथ ही न्यायालय ने प्रशासन को दुकानदारों द्वारा दिए गए पुनर्वास एवं वैकल्पिक व्यवस्था संबंधी आवेदनों पर सुनवाई कर कारणयुक्त आदेश पारित करने के निर्देश भी दिए हैं।
मामला दुर्ग के रविशंकर स्टेडियम परिसर में वर्षों से संचालित दुकानों को खाली कराने के लिए जारी किए गए नोटिस से जुड़ा है। प्रशासन ने जर्जर भवन का हवाला देते हुए दुकानदारों को दुकानें खाली करने का निर्देश दिया था, जिसके विरुद्ध झम्मन साहू सहित अन्य दुकानदारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने माना कि भवन जर्जर होने के कारण सार्वजनिक सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि संबंधित दुकानदार लंबे समय से वहीं व्यवसाय कर रहे हैं और उनकी आजीविका उन्हीं दुकानों पर निर्भर है। इसलिए प्रशासन को निष्पक्ष एवं मानवीय प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रशासन दुकानदारों के पुनर्वास अथवा वैकल्पिक व्यवस्था के संबंध में दिए गए आवेदनों पर विचार करेगा, उन्हें सुनवाई का अवसर देगा और उसके बाद कारणयुक्त आदेश पारित करेगा। साथ ही चार माह तक कोई भी दमनात्मक या बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि इस अवधि में यदि जर्जर भवन में कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं दुकानदारों की होगी।
अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि इस आदेश से स्टेडियम पुनर्निर्माण की जिला प्रशासन की प्रस्तावित कार्यवाही फिलहाल धीमी पड़ सकती है। अब प्रशासन को सीधे बेदखली की बजाय न्यायालय के निर्देशानुसार विधिसम्मत प्रक्रिया अपनानी होगी तथा पुनर्वास संबंधी आवेदनों पर विचार कर निर्णय लेना होगा।








