दुर्ग। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), दुर्ग द्वारा 25 से 29 जुलाई 2026 तक आयोजित पांच दिवसीय कम्यूनिटी मीडियेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्साहपूर्ण वातावरण में संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागी पूरे मनोयोग से सीखने, संवाद स्थापित करने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य “वाद-मुक्त ग्रामीण भारत” की अवधारणा को साकार करना है। इसके तहत जिले के पांच चयनित ग्राम पंचायत—घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम एवं कुथरेल—से चयनित कम्यूनिटी मीडियेटर्स को व्यवहारिक एवं संवाद आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उद्घाटन समारोह में उपस्थित मीडिया प्रतिनिधियों ने प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता, संवादात्मक शिक्षण पद्धति और सामाजिक समरसता के प्रति उनके सकारात्मक दृष्टिकोण की सराहना की।
प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत निकुम से माधव प्रसाद देशमुख, भागवत राम पटेल एवं श्रीमती मंजुषा मेश्राम, घुघसीडीह से मोहन सोनी, गोवर्धन बारले एवं श्रीमती ललिता बारले, कुथरेल से श्रीमती गीता गजपाल एवं डॉ. लोकनाथ साहू, अरसनारा से श्रीमती राधा निषाद एवं बरातूराम निषाद तथा ननकट्ठी से रवि साहू एवं बुद्धि सागर वर्मा भाग ले रहे हैं। इन्हें अनुभवी पोटेंशियल ट्रेनर्स द्वारा व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
कार्यक्रम की सबसे प्रेरणादायी विशेषताओं में से एक ग्राम पंचायत घुघसीडीह के गोवर्धन बारले और उनकी पत्नी श्रीमती ललिता बारले की संयुक्त सहभागिता रही। पति-पत्नी के रूप में दोनों प्रशिक्षण में शामिल होकर न केवल समाज सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर रहे हैं, बल्कि प्रशिक्षण के दौरान एक-दूसरे का सहयोग करते हुए संवाद, सहयोग और आपसी सम्मान की मिसाल भी पेश कर रहे हैं।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मानना है कि जब परिवार संवाद और सहमति की भावना के साथ समाज के बीच कार्य करता है, तब सामाजिक विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का मार्ग और अधिक मजबूत होता है। गोवर्धन एवं ललिता बारले की सहभागिता इसी सोच को साकार करती है और यह संदेश देती है कि कम्यूनिटी मीडियेशन केवल विवाद समाधान का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और विश्वास को मजबूत करने का प्रभावी अभियान है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर ऐसे प्रशिक्षित मीडियेटर्स तैयार किए जा रहे हैं, जो छोटे-छोटे विवादों का आपसी संवाद और सहमति के आधार पर समाधान कर न्यायालयों पर बढ़ते बोझ को कम करने के साथ-साथ गांवों में शांति, भाईचारा और सामाजिक समरसता को भी मजबूत करेंगे।








