रायपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने कापन रेलवे स्टेशन पर ओवरब्रिज (फुट ओवरब्रिज) जैसी आवश्यक सुरक्षा सुविधा उपलब्ध नहीं होने को एक यात्री की मृत्यु का प्रमुख कारण माना और मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
प्रकरण के अनुसार, 2 जुलाई 2023 को एक यात्री कापन रेलवे स्टेशन से तिलदा- नेवरा जाने के लिए टिकट लेने पहुंचा था। स्टेशन पर केवल एक टिकट काउंटर होने तथा दूसरे प्लेटफॉर्म तक सुरक्षित पहुंचने के लिए फुट ओवरब्रिज या अन्य सुरक्षित व्यवस्था नहीं होने के कारण उसे रेल पटरी पार करनी पड़ी। टिकट लेने के बाद वापस लौटते समय वह डाउन लाइन से आ रही ट्रेन की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। इस घटना की रिपोर्ट शासकीय रेल पुलिस (जीआरपी) थाना चांपा में दर्ज की गई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान रेलवे ने तर्क दिया कि यात्री एलसी गेट का उपयोग कर सुरक्षित रूप से टिकट लेने जा सकता था। हालांकि आयोग ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि स्टेशन पर सुरक्षित आवागमन की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है। आयोग ने माना कि फुट ओवरब्रिज के अभाव में यात्रियों को मजबूरन रेल पटरी पार करनी पड़ती है, जिससे दुर्घटना का गंभीर खतरा बना रहता है। इसे रेलवे की सेवा में कमी (Deficiency in Service) तथा अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) माना गया।
आयोग ने अपने आदेश में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को निर्देश दिया कि वह परिवादी पक्ष को 10 लाख रुपये का मुआवजा 28 अगस्त 2024 से भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके अतिरिक्त तीनों परिवादियों को मानसिक पीड़ा के लिए 25-25 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये भी देने का आदेश दिया गया है। आयोग ने आदेश की तिथि से 45 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में परिवादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता निशात गुल ने पैरवी की। यह निर्णय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर के अध्यक्ष डॉ. केश्वर प्रसाद शर्मा तथा सदस्य श्रीमती निरुपमा प्रधान एवं श्री अनिल कुमार अग्निहोत्री की पीठ ने 17 जुलाई 2026 को पारित किया।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला उन रेलवे स्टेशनों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है, जहां आज भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए फुट ओवरब्रिज जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। यह निर्णय रेलवे प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्थाओं में सुधार करने की जिम्मेदारी की भी याद दिलाता है।








