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बालोद: राइस मिल की लापरवाही ने बुझा दिया 24 वर्षीय मजदूर का चिराग! 12 फीट गहरी पानी टंकी में डूबने से बिहार के युवक की मौत, सुरक्षा इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल

 

निकुम। अर्जुन्दा थाना क्षेत्र के निकुम स्थित विद्या विशु खुरसुनी राइस मिल परिसर में गुरुवार देर रात पानी की टंकी में डूबने से बिहार निवासी 24 वर्षीय मजदूर की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद राइस मिल परिसर में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक की पहचान बिहार के पूर्णिया जिले के मोहनिया गांव निवासी पिसे शाह के रूप में बताई जा रही है, जो मिल के फैक्टरी सेक्शन में कर्मचारी के रूप में काम करता था।

बताया जा रहा है कि गुरुवार रात करीब 11 बजे तक जब पिसे शाह अपने कार्यस्थल पर दिखाई नहीं दिया तो उसकी तलाश शुरू की गई। खोजबीन के दौरान मिल परिसर में स्थित पानी की टंकी में चप्पल तैरती दिखाई दी। संदेह होने पर पानी में तलाश की गई तो युवक का शव बरामद हुआ। घटना की सूचना मिलते ही अर्जुन्दा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकलवाकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए गुण्डरदेही भेजा गया।

12 फीट गहरी टंकी, लेकिन सुरक्षा के नाम पर इंतजाम?

घटना को लेकर सबसे बड़ा सवाल मिल परिसर में बनी पानी की टंकी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। जानकारी के अनुसार बॉयलर में पानी की सप्लाई के लिए बनाई गई यह टंकी करीब 12 फीट गहरी बताई जा रही है। आरोप है कि टंकी का बड़ा हिस्सा खुला है और उसके आसपास पर्याप्त सुरक्षा घेराबंदी अथवा चेतावनी संकेतक नहीं हैं।

बताया जाता है कि मिल में काम करने वाले मजदूर रोजमर्रा के उपयोग तथा नहाने के लिए भी आसपास उपलब्ध पानी का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में इतनी गहरी पानी टंकी के आसपास सुरक्षा इंतजाम नहीं होना गंभीर लापरवाही का विषय बन सकता है।

अंधेरा और बंद CCTV ने बढ़ाए सवाल

घटना के बाद मिल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर एक और गंभीर सवाल सामने आया है। बताया जा रहा है कि पानी की टंकी के आसपास पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। वहीं मिल परिसर में लगे CCTV कैमरों के बंद होने की बात भी सामने आ रही है।

यदि CCTV बंद थे तो यह भी जांच का विषय है कि घटना से पहले युवक टंकी के आसपास कैसे पहुंचा और वहां वास्तव में क्या हुआ। हालांकि इन सभी तथ्यों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

क्या सुरक्षा के लिए मिल प्रबंधन जिम्मेदार नहीं?

मजदूरों से प्रतिदिन काम लेने वाले औद्योगिक परिसर में ऐसी गहरी पानी की टंकी यदि खुले स्थान पर मौजूद है तो उसकी सुरक्षा, घेराबंदी, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और चेतावनी बोर्ड की जिम्मेदारी किसकी थी—यह सवाल अब गंभीरता से उठाया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि टंकी को सुरक्षित तरीके से घेरा गया होता और वहां पर्याप्त रोशनी व चेतावनी के इंतजाम होते तो शायद युवक की जान बचाई जा सकती थी। घटना को महज एक दुर्घटना मानकर छोड़ने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की भी जांच आवश्यक है।

परिजनों को समझाइश के बाद मामला शांत कराने की चर्चा

घटना के बाद मृतक के परिजनों को समझाइश देकर मामला शांत कराने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि इस संबंध में किसी भी प्रकार के समझौते अथवा अन्य व्यवस्था को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

राइस मिल से जुड़े राजनीतिक कनेक्शन की भी चर्चा

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि उक्त राइस मिल का संबंध एक बड़े कांग्रेस नेता से बताया जाता है। हालांकि इस संबंध में किसी राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका अथवा मिल के स्वामित्व की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह पहलू भी जांच का विषय हो सकता है कि मिल का वास्तविक संचालन और प्रबंधन किसके जिम्मे है तथा वहां श्रमिकों की सुरक्षा के लिए क्या-क्या प्रबंध किए गए थे।

पुलिस जांच से सामने आएगा असली कारण*

फिलहाल अर्जुन्दा पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। युवक टंकी तक किस परिस्थिति में पहुंचा, वह वहां क्यों गया, रात के समय वहां प्रकाश की क्या व्यवस्था थी, CCTV काम कर रहे थे या नहीं और पानी की टंकी के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं थी—इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे।

एक युवा मजदूर की जिंदगी खत्म हो गई, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह केवल दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था या सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी चूक थी, जिसे समय रहते रोका जा सकता था? परिवार का एक सदस्य हमेशा के लिए चला गया है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी है।

[इस खबर के संकलन कर्ता रिपोर्टर दिलीप साहू है। दिलीप साहू दुर्ग जिले के स्थानीय ग्रामीण रिपोर्टर है जो दुर्ग और बालोद के स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ रखते हैं, अलग अलग संस्थानों में काम करने का 15 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है]

 

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Author: Dhaara News

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