अर्जुंदा–आमटी मार्ग पर श्रेय की सियासत तेज!
बालोद/गुंडरदेही। अर्जुंदा–आमटी मार्ग के निर्माण के लिए ₹25.83 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति क्या मिली, क्षेत्र की राजनीति में सड़क से ज्यादा अब श्रेय लेने की होड़ चर्चा का विषय बन गई है।
एक ओर गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद की ओर से जारी पोस्ट में धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम को प्रमुखता देते हुए इसे जनसंघर्ष की जीत बताया जा रहा है। दूसरी ओर भाजपा के बालोद जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख की ओर से जारी पोस्ट में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव के प्रति आभार जताते हुए इसे सरकार के प्रयासों से मिली बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यानी सड़क एक, स्वीकृति ₹25.83 करोड़ की… लेकिन श्रेय के दावेदार दोनों राजनीतिक खेमे!
श्रेय की राजनीति ने बढ़ाई चर्चा
क्षेत्र में अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सड़क कब बनेगी। राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया में चर्चा इस बात की भी है कि इस सड़क का श्रेय आखिर किसके खाते में जाएगा?
विधायक कुंवर सिंह निषाद के समर्थक इसे आंदोलन और जनसंघर्ष का परिणाम बता रहे हैं, वहीं भाजपा खेमे की ओर से सरकार की प्रशासनिक स्वीकृति और शासन स्तर के प्रयासों को उपलब्धि के रूप में सामने रखा जा रहा है।
दोनों पक्ष अपने-अपने तरीके से सड़क को लेकर अपनी भूमिका जनता के सामने रख रहे हैं।
लेकिन इसी श्रेय की राजनीति के बीच अब एक और सवाल तेजी से उठ रहा है—
आज सड़क का श्रेय लेने की होड़ है… कल सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठा तो जिम्मेदारी कौन लेगा?
सड़क सकरी, कई जगह गड्ढे… अब होगा क्या?
अर्जुंदा–आमटी मार्ग की मौजूदा स्थिति भी इस पूरी बहस का अहम हिस्सा है। सड़क कई स्थानों पर सकरी बताई जा रही है और जगह-जगह गड्ढों की समस्या भी सामने आती रही है।
ऐसे में ₹25.83 करोड़ की स्वीकृति के बाद लोगों की उम्मीद सिर्फ गड्ढे भरने तक सीमित नहीं है।
क्षेत्रवासी जानना चाहते हैं—
क्या सड़क का चौड़ीकरण होगा?
क्या भविष्य के बढ़ते यातायात को ध्यान में रखकर सड़क बनाई जाएगी?
या पुरानी सड़क पर ही मरम्मत और नई परत चढ़ाकर काम पूरा कर दिया जाएगा?
क्योंकि यदि सड़क की चौड़ाई में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आने वाले वर्षों में इस मार्ग पर आवागमन की वास्तविक सुविधा कितनी बढ़ेगी।
और अगर कल निर्माण में गड़बड़ी सामने आई तो?
यही वह सवाल है जिस पर क्षेत्र में अब जमकर चर्चा होने लगी है।
जब सड़क की स्वीकृति का श्रेय लेने के लिए दोनों राजनीतिक दलों के नेता अपनी-अपनी भूमिका सामने रख रहे हैं, तो जनता यह भी पूछ रही है कि भविष्य में यदि निर्माण की गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत सामने आती है, काम में अनियमितता का आरोप लगता है या सड़क समय से पहले खराब हो जाती है, तब—
“उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?”
ध्यान रहे, अभी किसी तरह की निर्माण संबंधी अनियमितता या भ्रष्टाचार का आरोप प्रमाणित नहीं है। लेकिन श्रेय़ की राजनीति के साथ जवाबदेही की राजनीति भी होनी चाहिए, यही सवाल क्षेत्र में उठ रहा है।
चौड़ीकरण में घर-दुकान आए तो?
सड़क के चौड़ीकरण का मुद्दा भी कम दिलचस्प नहीं है।
यदि भविष्य में मार्ग का चौड़ीकरण होता है और इसकी जद में मकान, दुकान या अन्य निर्माण आते हैं, तो प्रभावित लोगों के मुआवजे, वैधानिक प्रक्रिया और पुनर्वास जैसे सवाल भी सामने आएंगे।
तब सवाल यह नहीं होगा कि सड़क का श्रेय किसने लिया।
तब सवाल होगा—
“जिनका घर या दुकान प्रभावित होगा, उनके साथ कौन खड़ा होगा?”
जनता की नजर अब पोस्टर पर नहीं, सड़क पर
अर्जुंदा–आमटी मार्ग को लेकर फिलहाल कांग्रेस और भाजपा दोनों खेमों में उपलब्धि का दावा दिखाई दे रहा है।
विधायक कुंवर सिंह निषाद के पोस्ट में आंदोलन और जनसंघर्ष प्रमुख है।
भाजपा जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख के पोस्ट में सरकार की स्वीकृति और मुख्यमंत्री–उपमुख्यमंत्री के प्रति आभार प्रमुख है।
लेकिन जनता के लिए असली परीक्षा अब पोस्टर की नहीं, निर्माण की होगी।
सड़क कितनी चौड़ी होगी?
कितनी मजबूत बनेगी?
कब तक बनेगी?
गुणवत्ता की निगरानी कौन करेगा?
और अगर गुणवत्ता पर सवाल उठा तो जवाबदेही किसकी होगी?
श्रेय की राजनीति बनाम जवाबदेही की राजनीति
अर्जुंदा–आमटी मार्ग अब सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे बालोद की स्थानीय राजनीति में श्रेय बनाम जवाबदेही की नई बहस का केंद्र बनता जा रहा है।
आज दोनों दलों के नेता कह रहे हैं—
“यह उपलब्धि हमारी है।”
क्षेत्र में अब लोग पूछ रहे हैं—
“ठीक है… लेकिन अगर कल सड़क में गड़बड़ी हुई तो जिम्मेदारी भी आपकी होगी?”
यही सवाल इस समय अर्जुंदा–आमटी मार्ग से लेकर बालोद की राजनीतिक चर्चाओं तक सबसे ज्यादा सुनाई दे रहा है।
क्योंकि विकास का श्रेय लेना आसान है…
लेकिन विकास की गुणवत्ता की जिम्मेदारी लेना ही असली परीक्षा होगी।







