चिंगरी में 7 साल तक कथित नियम विरुद्ध मत्स्य पालन, पंचायत कर्मचारियों के साथ मत्स्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल
दुर्ग। अवैध खनन के खिलाफ सरकार की सख्ती और बढ़े जुर्माने के बीच ग्राम पंचायत चिंगरी में सामने आए कथित अवैध मत्स्य पट्टे का मामला फिर चर्चा में है। सवाल उठ रहा है कि जब अवैध खनन पर कार्रवाई हो सकती है, तो नियम विरुद्ध जारी किए गए कथित मत्स्य पट्टे पर कार्रवाई कब होगी?
चिंगरी के पांच तालाबों
में वर्ष 2018 से 2025 तक कथित तौर पर नियम विरुद्ध पट्टे के आधार पर मत्स्य पालन किए जाने का मामला सामने आया है। 16 फरवरी 2026 की जनपद पंचायत जांच रिपोर्ट और 30 जुलाई 2026 के ग्राम पंचायत पत्र में भी कथित अवैध पट्टे तथा आर्थिक नुकसान का उल्लेख किया गया है।
सबसे अहम बात यह है कि 19 फरवरी 2026 को उप संचालक मत्स्य पालन, दुर्ग ने स्वयं कलेक्टर को लिखे पत्र में कहा कि तालाबों के लीज आबंटन की कार्यवाही विभाग द्वारा नहीं की गई थी।
इसके बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सात वर्षों तक हुए मत्स्य पालन से कितनी आय हुई, पंचायत को कितनी लीज राशि मिलनी चाहिए थी और शासन अथवा पंचायत को कितनी आर्थिक क्षति हुई।
*पंचायत कर्मचारियों के बाद विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही कब?*
यदि तत्कालीन पंचायत पदाधिकारियों ने नियम विरुद्ध पट्टा जारी किया था तो उनकी भूमिका की जांच और कार्रवाई जरूरी है। लेकिन सवाल यह भी है कि इतने लंबे समय तक तालाबों में मत्स्य पालन चलता रहा तो मछली पालन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने इसकी जांच और निगरानी क्यों नहीं की?
क्या विभाग ने कभी मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखी?
क्या उत्पादन और आय का आकलन किया गया?
क्या कथित अवैध लाभ की वसूली के लिए कोई प्रक्रिया शुरू हुई?
*अब कागजी कार्रवाई नहीं, जमीन पर जांच की मांग*
मामले में मांग उठ रही है कि पांचों तालाबों की मौके पर जांच कर वर्ष 2018 से 2025 तक हुए मत्स्य पालन, वास्तविक उत्पादन, वैध लीज दर और पंचायत को हुई आर्थिक क्षति का निर्धारण किया जाए। साथ ही पट्टा जारी करने वाले पंचायतकर्मियों के साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो।
अवैध खनन पर सरकार ने सख्ती दिखाई है। अब सवाल चिंगरी के कथित अवैध मत्स्य पट्टे को लेकर है—आखिर पंचायत कर्मचारियों और मछली पालन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर शिकंजा कब कसेगा?







