दुर्ग/रायपुर। भारतीय कृषि महाविद्यालय दुर्ग में प्रश्नपत्र लीक मामले में सहायक प्राध्यापक योगेश सोनकेशरिया की गिरफ्तारी के बाद अब कई अहम सवाल जांच की दिशा तय करेंगे।
पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी के कथित मेमोरेंडम के अनुसार उसने 6 अगस्त को स्ट्रांग रूम से प्रश्नपत्र निकालकर घर ले जाने, सीलबंद लिफाफे से छेड़छाड़ कर प्रश्नपत्र देखने और दो छात्रों को ₹10 हजार में देने की बात बताई है। इसके बाद 7 अगस्त को प्रश्नपत्र वापस स्ट्रांग रूम में रखने की बात भी दर्ज है।
अब सवाल है कि स्ट्रांग रूम की चाबी किसके नियंत्रण में थी? 6 अगस्त को आरोपी के प्रवेश का CCTV रिकॉर्ड क्या कहता है? प्रश्नपत्र की सील और लिफाफे की फोरेंसिक जांच हुई या नहीं? कथित ₹10 हजार का लेनदेन किस माध्यम से हुआ? आरोपी के मोबाइल और छात्रों के मोबाइल से क्या साक्ष्य मिले?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि क्या यह पूरा काम आरोपी ने अकेले किया या प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था में किसी अन्य स्तर पर भी लापरवाही अथवा भूमिका थी?
जांच में प्रश्नपत्र की पूरी Chain of Custody—रायपुर से प्राप्त होने से लेकर स्ट्रांग रूम में रखने और परीक्षा के दिन वितरण तक—की जांच जरूरी है।
साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि क्या इससे पहले किसी अन्य परीक्षा के प्रश्नपत्र के साथ ऐसी घटना हुई थी।
गिरफ्तारी पहला कदम है, लेकिन अब असली सवाल जांच का है—क्या कार्रवाई सिर्फ एक प्रोफेसर और छात्रों तक सीमित रहेगी या प्रश्नपत्र सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी भी तय होगी?







