रिसाली/दुर्ग। आगामी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर रिसाली नगर निगम में राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। चुनावी तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा कदम उठाते हुए रिसाली नगर निगम की जिम्मेदारी अनुराग सिंह देव को प्रभारी के रूप में सौंपी है। वहीं श्वेता शर्मा और आसु चंद्रवंशी को सहप्रभारी नियुक्त किया गया है।
भाजपा की यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब प्रदेश के उन नगरीय निकायों में चुनावी तैयारियां शुरू हो गई हैं, जिनका कार्यकाल वर्ष 2026 के अंत में पूरा होने वाला है। रिसाली नगर निगम भी इन निकायों में शामिल है। पार्टी अब स्थानीय संगठन, संभावित प्रत्याशियों और वार्ड स्तर की राजनीतिक स्थिति को लेकर अपनी तैयारियों को गति देगी।
*आरक्षण की तस्वीर साफ होने का इंतजार*
रिसाली नगर निगम में कुल 40 वार्ड हैं। आगामी चुनाव में कौन सा वार्ड किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा, इसे लेकर संभावित दावेदारों और राजनीतिक दलों की नजर आरक्षण प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
फिलहाल 2026 के चुनाव के लिए रिसाली की नई वार्डवार आरक्षण सूची सार्वजनिक होने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में 2021 के आरक्षण को आधार बनाकर दावेदारी तय करना जल्दबाजी होगी। वर्ष 2021 में भी रिसाली के 40 वार्डों के लिए अलग से आरक्षण प्रक्रिया पूरी की गई थी।
*आरक्षण बदलते ही बदल सकता है राजनीतिक समीकरण*
रिसाली के कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के संभावित दावेदारों ने अभी से अपनी सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है। लेकिन आरक्षण की नई तस्वीर सामने आने के बाद कई दावेदारों की रणनीति बदल सकती है।
यदि मौजूदा वार्ड का आरक्षण बदलता है तो सामान्य, महिला, ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से जुड़े दावेदारों के समीकरण भी प्रभावित होंगे। यही वजह है कि राजनीतिक दलों के साथ-साथ संभावित पार्षद प्रत्याशी भी आरक्षण की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।
*भाजपा ने पहले ही बढ़ाया कदम*
भाजपा द्वारा प्रभारी और सहप्रभारियों की नियुक्ति को चुनावी तैयारियों की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। अब प्रभारी-सहप्रभारी स्थानीय संगठन के साथ समन्वय कर वार्डवार राजनीतिक स्थिति, संगठन की मजबूती और संभावित प्रत्याशियों की स्थिति का आकलन कर सकते हैं।
रिसाली में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आरक्षण की नई तस्वीर क्या होगी और आरक्षण बदलने के बाद किस वार्ड से कौन सा चेहरा चुनावी मैदान में उतरेगा? आने वाले दिनों में आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिसाली की चुनावी राजनीति और अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।







