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बड़ी खबर: दुर्ग जनपद में खरीदी का ‘माकड़ी कनेक्शन’! ₹2.40 करोड़ के स्ट्रीट लाइट कार्यों पर सवाल, पंचायतों को खबर तक नहीं?

 

GeM खरीदी से लेकर पानी टैंकर, जिम सामग्री, कबड्डी मैट और स्मार्ट क्लास तक जांच के घेरे में! जनपद सदस्य ढालेश साहू ने RTI से जुटाए दस्तावेज, शिकायतों के बाद कार्रवाई का इंतजार; बोले—फाइल तैयार हो रही है, कई जिम्मेदारों की भूमिका की होगी पड़ताल

दुर्ग। जनपद पंचायत दुर्ग में सरकारी खरीदी और विकास कार्यों की स्वीकृति एवं क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जनपद सदस्य एवं किसान नेता ढालेश साहू ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी और विभिन्न शिकायतों के आधार पर कई खरीदी प्रक्रियाओं तथा विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग उठाई है। मामला केवल खरीदी तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ राज्य विकास प्राधिकरण के तहत स्ट्रीट लाइट स्थापना के लिए जनपद पंचायत दुर्ग अंतर्गत लगभग 2 करोड़ 40 लाख रुपये के स्वीकृत कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। साहू का दावा है कि कई ग्राम पंचायतों को इन कार्यों की स्वीकृति और प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी तक नहीं है। यदि दस्तावेजों से इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला सरकारी धन के उपयोग और पंचायतों की भूमिका से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

₹2.40 करोड़ के स्ट्रीट लाइट कार्यों पर सबसे बड़ा सवाल

ढालेश साहू के अनुसार, जनपद पंचायत दुर्ग के अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों में स्ट्रीट लाइट स्थापना के लिए करीब 2 करोड़ 40 लाख रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। लेकिन इन कार्यों की जानकारी संबंधित ग्राम पंचायतों तक किस स्तर पर पहुंची, स्वीकृति किस प्रक्रिया से मिली और कार्यों के क्रियान्वयन में पंचायतों की क्या भूमिका है—इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आना बाकी हैं।

साहू का कहना है कि सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में कुछ ग्राम पंचायतों ने कार्यों की स्वीकृति की जानकारी होने की बात कही है, जबकि अन्य पंचायतों से अपेक्षित स्पष्टता नहीं मिली। ऐसे में सवाल है कि आखिर किन पंचायतों में कौन-से कार्य स्वीकृत हुए, किस एजेंसी या विभाग के माध्यम से उनका क्रियान्वयन होना है और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है?

यहां सबसे अहम बात यह है कि स्वीकृति, वास्तविक कार्य, भुगतान और भौतिक सत्यापन के दस्तावेजों का आपस में मिलान होने के बाद ही अनियमितता की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

GeM पोर्टल पर खरीदी, लेकिन OTP किसका और ऑर्डर कौन कर रहा है?

सरकारी खरीदी में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए GeM पोर्टल का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन ढालेश साहू ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में ग्राम पंचायतों को समुचित जानकारी दिए बिना उनसे OTP मांगे जाने और जनपद पंचायत स्तर से ही ऑर्डर किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। जो आगे जाकर सरपंच और सचिव पर गाज गिरने के लिए काफी है।

यदि किसी पंचायत के नाम पर खरीदी की जा रही है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि मांग किसने रखी, खरीदी की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति किसने दी, पोर्टल पर ऑर्डर किस अधिकृत व्यक्ति ने किया और सामग्री की आपूर्ति एवं प्राप्ति का सत्यापन किसने किया।

साहू के मुताबिक, इस संबंध में शिकायत भी की जा चुकी है और अब कार्रवाई का इंतजार है। हालांकि, OTP के कथित इस्तेमाल, अधिकृत लॉगिन और ऑर्डर प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

सवाल सीधा है—यदि खरीदी पंचायत के लिए है, तो पंचायत को पूरी जानकारी क्यों नहीं? और यदि प्रक्रिया नियमानुसार हुई है, तो संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच के लिए स्पष्ट क्यों नहीं होने चाहिए?

पानी टैंकर से स्मार्ट क्लास तक, कई खरीदी मामलों की पड़ताल

जनपद सदस्य ढालेश साहू ने पानी टैंकर, जिम सामग्री, कबड्डी मैट, स्मार्ट क्लास स्थापना तथा अन्य सामग्री की खरीदी को भी जांच के दायरे में लाने की बात कही है। उनका दावा है कि अलग-अलग खरीदी प्रक्रियाओं और कार्यों से संबंधित दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं तथा मामलेवार फाइल तैयार की जा रही है।

इन मामलों में खरीदी की मांग, स्वीकृति आदेश, GeM पर उपलब्ध तुलनात्मक दरें, चयनित विक्रेता, कार्यादेश, बिल, भुगतान विवरण, सामग्री प्राप्ति प्रमाणपत्र और वास्तविक स्थल पर उपलब्ध सामग्री का मिलान महत्वपूर्ण होगा।

क्या सामग्री निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप खरीदी गई? क्या निर्धारित दर पर खरीदी हुई? क्या सामग्री संबंधित पंचायत या संस्था तक पहुंची? क्या स्मार्ट क्लास अथवा जिम सामग्री के नाम पर स्वीकृत कार्य वास्तव में पूरे हुए? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब दस्तावेजी जांच और भौतिक सत्यापन से ही मिल सकता है।

फिलहाल, इन सभी खरीदी मामलों में अनियमितता या भ्रष्टाचार सिद्ध होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए प्रत्येक प्रकरण की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

माकड़ी जनपद का उदाहरण देकर उठाए सवाल

ढालेश साहू ने कोण्डागांव जिले के माकड़ी जनपद पंचायत में सामने आए कथित सोलर लाइट प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा है कि सरकारी खरीदी और कार्यादेशों से जुड़े मामलों में दस्तावेजों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। माकड़ी मामले में फर्जी कार्यादेश से जुड़े आरोपों पर FIR दर्ज होने की खबरें सामने आई थीं।

साहू का दावा है कि दुर्ग जनपद में भी खरीदी और कार्यादेशों से संबंधित कुछ मामलों की पड़ताल की जा रही है। उनका कहना है कि माकड़ी की तरह यदि दस्तावेजों की जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

उन्होंने इस मामले को विधानसभा में भाजपा विधायक लता उसेंडी द्वारा उठाए जाने का भी उल्लेख किया है। इस संदर्भ में विधानसभा की कार्यवाही और संबंधित प्रकरण के आधिकारिक रिकॉर्ड से विवरण का मिलान किया जाना आवश्यक है।

अब दस्तावेजों से तय होगी जवाबदेही

ढालेश साहू का कहना है कि विभिन्न मामलों से जुड़े दस्तावेजों को व्यवस्थित कर आगे शिकायत और जांच की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी। उन्होंने संकेत दिया है कि खरीदी, कार्यादेश और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका को लेकर और तथ्य सामने आ सकते हैं।

अब निगाहें जनपद पंचायत दुर्ग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों पर हैं। क्या शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या GeM पोर्टल के ऑर्डर, OTP से संबंधित रिकॉर्ड और भुगतान विवरण की पड़ताल की जाएगी? क्या 2 करोड़ 40 लाख रुपये के स्ट्रीट लाइट कार्यों की पंचायतवार सूची, स्वीकृति आदेश और भौतिक प्रगति सार्वजनिक की जाएगी?

इन सवालों के जवाब से ही स्पष्ट होगा कि मामला प्रक्रियागत कमियों तक सीमित है या इसमें किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है।

फिलहाल दुर्ग जनपद में उठे सवालों का अंतिम जवाब आरोपों से नहीं, बल्कि फाइलों, भुगतान रिकॉर्ड, पोर्टल लॉग और जमीन पर हुए काम के सत्यापन से सामने आएगा

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Author: Dhaara News

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