Dhaara News

राज्योत्सव के मंच से अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, SIR पर संसद में बहस की चुनौती, राहुल गांधी को भी घेरा

 

 रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। नवा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष को खुली चुनौती दी। शाह ने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने के लिए तैयार है। यदि आवश्यकता पड़ी तो विशेष संसदीय सत्र बुलाने पर भी विचार किया जा सकता है। अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति, कथित नकली संसद और नक्सलवाद के मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा।

SIR पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने की पेशकश

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार संसद में हर महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार है। विपक्ष को यदि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कोई आपत्ति है, तो उसे संसद के भीतर अपने सवाल और तर्क रखने चाहिए।उन्होंने राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं से संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने की अपील की। शाह ने कहा कि लोकतंत्र से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए संसद से बेहतर कोई मंच नहीं हो सकता। सरकार इस मुद्दे पर बहस से पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ने पर विशेष सत्र बुलाने के लिए भी तैयार है।कांग्रेस नेताओं द्वारा संविधान की प्रति लेकर किए जाने वाले प्रदर्शनों पर भी गृह मंत्री ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संविधान के प्रति सम्मान केवल उसकी प्रति हाथ में लेकर दिखाने से साबित नहीं होता, बल्कि राजनीतिक व्यवहार में भी संवैधानिक मूल्यों का पालन होना चाहिए।

राहुल गांधी की कथित नकली संसद पर उठाए सवाल

केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस की ओर से आयोजित मॉक पार्लियामेंट को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद के बाहर अलग से संसद जैसा आयोजन करना देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था की गरिमा के अनुरूप नहीं है।शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि एक तरफ संसद की कार्यवाही बाधित की जाती है और दूसरी तरफ बाहर अलग मंच तैयार करके बहस का दिखावा किया जाता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को वास्तविक संसदीय चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए।हालांकि, ये आरोप अमित शाह ने अपने राजनीतिक संबोधन के दौरान लगाए। इस कार्यक्रम के संदर्भ में राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से इन टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आई है।

नक्सलवाद को लेकर कांग्रेस की भूमिका पर उठाए सवाल

राज्योत्सव समारोह में अमित शाह ने नक्सलवाद के मुद्दे पर भी कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने माओवादियों की कथित समानांतर व्यवस्था ‘जनताना सरकार’ का समर्थन किया था।शाह के मुताबिक, माओवादी संगठनों ने संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था से अलग अपनी प्रशासनिक संरचना तैयार कर रखी थी। इसमें मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री जैसे पद भी बनाए गए थे। उन्होंने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के वर्ष 2010 के एक कथित बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए पर्याप्त राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई गई।

नक्सलवाद के खात्मे को लेकर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं

अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार की रणनीति तथा सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से इस दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।उन्होंने बताया कि माओवादी संगठनों से जुड़े लोगों को हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया गया। शाह ने दावा किया कि करीब 90 प्रतिशत माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि शेष 10 प्रतिशत सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए।इस अभियान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, छत्तीसगढ़ पुलिस और स्थानीय नागरिकों के योगदान की भी उन्होंने सराहना की। गृह मंत्री ने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण बस्तर और आसपास के इलाकों में लंबे समय तक विकास प्रभावित रहा।

आदिवासी परिवारों की पीड़ा का किया जिक्र

अपने संबोधन में शाह ने नक्सली हिंसा से प्रभावित आदिवासी परिवारों की समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने मानवाधिकारों के नाम पर नक्सलवाद का समर्थन करने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिंसा का शिकार हुए गरीब आदिवासियों के जीवन और अधिकारों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों ने लंबे समय तक हिंसा और असुरक्षा का सामना किया है। अब शांति स्थापित होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसी सुविधाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है।

बस्तर को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य

अमित शाह ने छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत को प्रदेश की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का प्रभाव कम होने से बस्तर सहित प्रभावित क्षेत्रों में पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।उन्होंने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य रखा।शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। आने वाले दस वर्षों में यहां के नागरिकों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश को संसाधनों की संपन्नता से जनसामान्य की आर्थिक समृद्धि तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

राज्योत्सव के मंच से राष्ट्रीय और प्रदेश की राजनीति पर साधा निशाना

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन समारोह में अमित शाह का संबोधन कई राजनीतिक और विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने जहां SIR के बहाने कांग्रेस और राहुल गांधी को संसद में चर्चा की चुनौती दी, वहीं नक्सलवाद के मुद्दे पर पिछली सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए।इसके साथ ही उन्होंने बस्तर के विकास, पर्यटन विस्तार और आदिवासी समाज की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने को लेकर केंद्र सरकार का दृष्टिकोण भी सामने रखा। उनका पूरा संबोधन राष्ट्रीय राजनीति से लेकर छत्तीसगढ़ के भविष्य की विकास योजनाओं तक केंद्रित रहा।

Dhaara News
Author: Dhaara News

Leave a Comment