
दुर्ग। एक तरफ ग्रामीण इलाके की जनता अपने जमीन-जायदाद, राजस्व और अन्य जरूरी कामों के लिए परेशान, दूसरी तरफ उनका नायब तहसीलदार वासुमित्र दीवान पिछले 2 महीने से लगातार गायब! न ऑफिस आते हैं, न फोन उठाते हैं, और न ही जिला प्रशासन ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था की। आम आदमी ठोकरें खा रहा है, लेकिन सिस्टम सोया हुआ है!
मामला तब और गरमा गया जब जिला युवा कांग्रेस (ग्रामीण) के अध्यक्ष जयंत देशमुख ने इसे सीधे “गुमशुदगी” का केस बना दिया। युवा कांग्रेस के एक बड़ा जत्था – जिसमें ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष गुरदीप सिंह भाटिया, जिला महासचिव दीपांकर साहू, ऋतुवेष हरमुख, युवा कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष यशवंत देशमुख, पंकज सिंह, राहुल साहू, दीपक कुमार, दानेश्वर देशमुख, हेमंत साहू, पुनेन्द्र निषाद समेत दर्जनों कार्यकर्ता – दुर्ग सिटी कोतवाली पहुंचे और नायब तहसीलदार की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की।
लेकिन चौंकाने वाली बात! थाना प्रभारी ने शिकायत लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा – “ये जिला प्रशासन का मामला है, यहां से नहीं होगा!” और युवा कांग्रेसियों को खाली हाथ लौटा दिया।
जयंत देशमुख ने गुस्से में कहा,
“ये मजाक नहीं, जनता की परेशानी है! एक सरकारी अधिकारी 2 महीने से गायब है, ऑफिस बंद पड़ा है, काम रुके हुए हैं। अगर ये गुमशुदगी नहीं तो क्या है? पुलिस FIR तक दर्ज नहीं कर रही, प्रशासन चुप है। क्या जनता को अब सड़कों पर उतरना पड़ेगा?”
युवा कांग्रेस का आरोप है कि नायब तहसीलदार विरोध स्वरूप या किसी अन्य कारण से जानबूझकर अनुपस्थित हैं, जिससे दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र की लाखों जनता मारी जा रही है।
*अब सवाल ये हैं:*
आखिर वासुमित्र दीवान कहाँ गायब हैं?
जिला प्रशासन 2 महीने से सोया क्यों है?
पुलिस ने गुमशुदगी रिपोर्ट क्यों नहीं ली?
क्या ये मामला अब बड़ी राजनीतिक लड़ाई में बदल जाएगा?
युवा कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज होगा – सड़कें जाम से लेकर घेराव तक कुछ भी हो सकता है!