दुर्ग जिले (छत्तीसगढ़) के भिलाई में कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कार्यालय में अनुशासनहीनता और नियमों की अवहेलना पर सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने 191 अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, क्योंकि वे देर से कार्यालय आ रहे थे और जल्दी चले जा रहे थे।
मुख्य कारण और पृष्ठभूमि
शासन और जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम (Biometric Attendance System) के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य है। नियमों के मुताबिक:
सुबह 10:00 बजे से पहले कार्यालय पहुँचना और बायोमेट्रिक मार्क करना जरूरी है।
शाम को 5:30 बजे के बाद ही कार्यालय छोड़ना चाहिए।
हाल ही में जब कलेक्टर कार्यालय और संबंधित विभागों में सभी कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति की जाँच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी सुबह 10 बजे के बाद दफ्तर पहुँच रहे थे।
कई लोग शाम 5:30 बजे से पहले ही घर या अन्य जगहों के लिए निकल जाते थे।
इस लापरवाही के कारण कार्यालय का कामकाज प्रभावित हो रहा था और जनता को सेवाएँ समय पर नहीं मिल पा रही थीं। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल कार्रवाई की।
नोटिस में शामिल प्रमुख नाम
जारी किए गए नोटिस में कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, जैसे:
अपर कलेक्टर (एडीएम) वीरेंद्र सिंह
अभिषेक अग्रवाल
माइनिंग इंस्पेक्टर गोपाल दास
असिस्टेंट माइनिंग इंस्पेक्टर दीपक तिवारी
एसडीएम हितेश पिरसदा
सिल्ली थामस (या इसी तरह के अन्य नाम)
तथा अन्य कई अधिकारी और कर्मचारी।
कुल 191 स्टाफ सदस्यों को यह नोटिस भेजा गया है।
नोटिस का उद्देश्य और आगे की कार्रवाई
नोटिस में प्रत्येक व्यक्ति से स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि:
उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए?
वे नियमों की अवहेलना क्यों कर रहे थे?
बायोमेट्रिक नियमों का पालन न करने का क्या कारण है?
कर्मचारियों को नोटिस का जवाब देने के लिए समय दिया गया है। यदि संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलता, तो विभागीय जांच और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई (जैसे वेतन वृद्धि रोकना, पदोन्नति रोकना, या अन्य दंड) हो सकती है।
कलेक्टर का संदेश
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सरकार की प्रशासनिक सुधार और कर्मचारी अनुशासन पर जोर देने वाली नीति का हिस्सा है। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्यालयों में समय पर उपस्थिति और पूर्ण कार्य दिवस सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि जनता को बेहतर सेवाएँ मिल सकें।
यह घटना सरकारी विभागों में बायोमेट्रिक सिस्टम के सख्ती से लागू होने और अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि ऐसे मामले अन्य जिलों में भी सामने आएँ, तो समान कार्रवाई की उम्मीद की जा सकती है।