
छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर 25 जुलाई 2025 को केरल की दो कैथोलिक ननों, सिस्टर प्रीति मैरी और सिस्टर वंदना फ्रांसिस, को मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस घटना ने केरल में व्यापक विरोध और सियासी हलचल पैदा की है। केरल मीडिया में भी यह मामला छाया हुआ है निम्नलिखित बिंदुओं में केरल से लेकर दुर्ग तक के मामले को हमने डिकोड करने का प्रयास किया है.
राजनीतिक विरोध प्रदर्शन:
केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) दोनों के सांसदों ने ननों की गिरफ्तारी की निंदा की और इसे “मनगढ़ंत” और अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताया। उन्होंने नई दिल्ली में संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किए।
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की, यह दावा करते हुए कि ननों को बजरंग दल की “फर्जी” शिकायत के आधार पर हिरासत में लिया गया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घटना को अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न और “भाजपा-आरएसएस का गुंडा राज” करार देते हुए सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
केरल से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल दुर्ग जेल पहुंचा और ननों से मुलाकात की। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की, जो कांग्रेस आलाकमान को रिपोर्ट सौंपेगी।
चर्च और ईसाई समुदाय का रुख:
सीरो-मालाबार चर्च और भारतीय कैथोलिक बिशप सम्मेलन (CBCI) ने गिरफ्तारी को “निराधार” और “सांप्रदायिक रूप से प्रेरित” बताते हुए इसका विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि नन तीन वयस्क महिलाओं को आगरा के फातिमा अस्पताल में नौकरी के लिए ले जा रही थीं, और उनके पास माता-पिता की लिखित सहमति थी।
CBCI ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की, इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया। चर्च ने इस मुद्दे को सभी उचित मंचों पर उठाने की बात कही।
कुछ चर्च अधिकारियों ने सतर्क रुख अपनाया, राजनीतिक विवाद से बचने की कोशिश करते हुए केंद्र सरकार से कार्रवाई का आश्वासन मिलने की बात कही।
छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्रवाई गलत: राजीव चन्द्रशेखर, अध्यक्ष केरल भाजपा
केरल में ईसाई समुदाय में इस गिरफ्तारी से डर और आक्रोश का माहौल है। कई संगठनों ने धार्मिक कट्टरता पर लगाम लगाने की मांग की।
केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने छत्तीसगढ़ पुलिस की कार्रवाई को गलत ठहराया और ननों की रिहाई के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ काम करने की बात कही, जिससे बजरंग दल ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
मानवाधिकार संगठनों और अन्य राजनीतिक दलों, जैसे माकपा और भाकपा, ने भी इस कार्रवाई की निंदा की और इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ साजिश बताया।
कानूनी स्थिति:
ननों की जमानत याचिका निचली अदालत और सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी, क्योंकि मामला मानव तस्करी (BNS धारा 143) से संबंधित है, जिसकी सुनवाई का अधिकार केवल बिलासपुर की NIA अदालत को है।
नन वर्तमान में दुर्ग केंद्रीय जेल में हैं, और जेल प्रशासन ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल में भर्ती कराने का वादा किया है।
यहां उल्लेखनीय होगी कि केरल की भाजपा इकाई कैथोलिक ननो के पक्ष में है वही प्रदेश भाजपा छत्तीसगढ़ बजरंग दल के पक्ष में है वही यह भी जानना जरूरी होगा कि दुर्ग का बजरंग दल दो गुटों में बंटा हुआ है लेकिन इस मामले पर एक नजर आ रहे हैं.