Dhaara News

धमधा (दुर्ग ) में मछुआरों की बचत सह राहत योजना में लगातार देरी, विभाग भगवान भरोसे चल रहा !! —मछुआरे परेशान

दुर्ग, 01 फरवरी 2026 — छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड में मछली पालन विभाग की बचत सह राहत योजना (Saving cum Relief Scheme) में भुगतान की लगातार देरी से सैकड़ों मछुआरे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। स्थानीय मछुआ सोसायटी विकास परिषद ने सितंबर 2025 में ही विभाग के संचालक को शिकायत पत्र भेजा था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। प्रभावित मछुआरों का कहना है कि विभाग भगवान भरोसे चल रहा है, जहां योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा।
पत्र के अनुसार, धमधा में कुल 38 मछुआ सोसायटी कार्यरत हैं। मानसून के दौरान मत्स्याखेट पर लगे प्रतिबंध (बंद ऋतु, आमतौर पर 16 जून से 15 अगस्त तक) में मछुआरों की आजीविका पूरी तरह प्रभावित होती है। योजना के तहत प्रत्येक हितग्राही को ₹4,500 (चार हजार पांच सौ रुपये) की राहत राशि मिलनी चाहिए—जिसमें मछुआरे का 9 महीने का अंशदान ₹1,500 और केंद्र-राज्य सरकार का योगदान ₹3,000 शामिल है। यह राशि प्रति माह ₹1,500 के हिसाब से 3 महीने के लिए दी जाती है। हालांकि, शिकायत पत्र में ₹3,000 का उल्लेख है, जो संभवतः पुरानी राशि या गणना का संदर्भ हो सकता है, लेकिन विभागीय दस्तावेजों (जैसे fish_folder.pdf) में स्पष्ट रूप से कुल ₹4,500 की पुष्टि होती है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में यह राशि कई मछुआरों तक नहीं पहुंची, जिससे बंद अवधि में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पत्र में कहा गया है कि “कई बार राशि नहीं मिलने से कुंभकों को आर्थिक हानि हो रही है”। शिकायत उच्च अधिकारियों—जैसे छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष भरत मटियारा, उपाध्यक्ष लखन लाल धीवर और संचालक मत्स्य पालन—तक पहुंचाई गई, लेकिन विभाग से कोई स्पष्ट जवाब या अपडेट नहीं मिला। विभागीय हेल्पलाइन या वेबसाइट (fisheries.cgstate.gov.in) पर आवेदन की सुविधा तो है, लेकिन स्थानीय स्तर पर वितरण में प्रशासनिक लापरवाही या फंड रिलीज की समस्या बनी हुई है।
छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत तालाब निर्माण, मछली बीज वितरण, सब्सिडी (40-60%), बीमा और अन्य सुविधाएं चल रही हैं, और हाल के वर्षों में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन मछुआरों की प्रत्यक्ष राहत योजनाओं में देरी की शिकायतें दुर्ग सहित कई जिलों से आ रही हैं। विभाग की ओर से हालिया गतिविधियां जैसे मंत्री रामविचार नेताम का दुर्ग में मत्स्य उत्पादन केंद्र निरीक्षण (जनवरी 2026) दिखाई देती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर मछुआरों को राहत नहीं मिल रही।
प्रभावित मछुआरे और सोसायटियां विभागीय हेल्पलाइन (0771-2443124) या ईमेल (dirfishery.cg@nic.in) पर संपर्क कर रही हैं, लेकिन कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिल रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समस्या बनी रहती है, तो सामूहिक शिकायत, जिला कलेक्टर या मंत्री स्तर पर फॉलो-अप, या मीडिया के माध्यम से ध्यानाकर्षण जरूरी है। अन्यथा, मछली पालन जैसे रोजगार सृजन वाले क्षेत्र में विश्वास की कमी बढ़ सकती है।
dhaaranews
Author: dhaaranews

Facebook
Twitter
WhatsApp
Reddit
Telegram

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमसे जुड़े

Weather Forecast

DELHI WEATHER

Gold & Silver Price

पंचांग