
छत्तीसगढ़ के भिलाई में चल रही पांच दिवसीय हनुमंत कथा के बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर सुर्खियों में हैं – और इस बार वजह है उनका तीखा तंज! प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए बाबा ने कहा: “जिस पत्रकार को खुजली हो, वो प्रश्न कर सकता है!”
यह बयान जैसे आग में घी डालने का काम कर गया। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हंगामा मच गया:
कांग्रेस का हमला: छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा वार बताया। पार्टी ने तंज कसा कि जिस बाबा को लेने के लिए भाजपा सरकार ने सरकारी चार्टर्ड प्लेन का दुरुपयोग किया (मंत्री खुद सतना गए थे उन्हें लाने!), वही अब पत्रकारों का अपमान कर रहे हैं।
पत्रकारों में आक्रोश: कई पत्रकारों ने इसे असंवेदनशील और लोकतंत्र विरोधी करार दिया। एक पत्रकार ने लिखा – “सवाल पूछना खुजली नहीं, हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी है। आस्था के नाम पर जवाबदेही से भागना बंद करो!”
समर्थकों का बचाव: बाबा के फैंस इसे उनकी बेबाक शैली बता रहे हैं। पहले भी वे “बिना खुजली वालों को खाज कर देते हैं” जैसे मुहावरे इस्तेमाल कर चुके हैं, मतलब – सच बोलकर लोगों को असहज कर देते हैं।
लेकिन यह अकेला विवाद नहीं! बाबा की छत्तीसगढ़ यात्रा पहले से ही राजनीतिक आग में घी डाल रही है:
पूर्व CM भूपेश बघेल और बाबा के बीच जुबानी जंग चरम पर – बघेल ने उन्हें “बीजेपी का एजेंट” और “पैसा बटोरने वाला” बताया, तो बाबा ने पलटवार किया कि अंधविश्वास मानने वाले देश छोड़ दें!
सरकारी प्लेन से आने और पुलिस अधिकारी के पैर छूने का वीडियो वायरल, कांग्रेस ने इसे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग कहा।
धर्मांतरण पर बाबा का बयान – “कैंसर से भी बड़ा खतरा”, और बांग्लादेश जैसी स्थिति की चेतावनी।
क्या यह बेबाकी है या अहंकार? क्या संतों की भाषा ऐसी होनी चाहिए? विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा, और कथा अभी जारी है… आगे और मसाला आने वाला है!








