ग्राम चिंगरी में शिव महापुराण कथा का यह दिवस समुद्र मंथन की महान कथा और भगवान शिव की जगत रक्षा की दिव्य लीला से जगमगा उठा। मां अंबे दुर्गा उत्सव नवयुवक मंडल द्वारा आयोजित इस पावन श्रृंखला में कथा व्यास पं. महेंद्र पांडेय जी ने हलाहल विष पान की प्रसिद्ध घटना को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से वर्णित किया, जिससे श्रोताओं के हृदय में शिव की करुणा और त्याग की भावना गहराई से उतर गई।

महाराज जी ने बताया कि देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति हेतु क्षीरसागर का समुद्र मंथन किया। मंदराचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बनाकर यह महान कार्य संपन्न हुआ। मंथन के प्रारंभ में ही हलाहल विष (कालकूट) निकला, जो इतना प्रचंड था कि उसकी ज्वाला और गंध से समस्त सृष्टि जलने लगी। यदि यह विष कहीं गिरता या फैलता, तो पूरा ब्रह्मांड नष्ट हो जाता। देव-असुर दोनों ही असहाय हो गए और सभी ने भगवान शिव की शरण ली। सत्य के राह में चलने वाले मनुष्यों को भी बुराईयों (विष) का सामना करना पड़ता है. उसी तरह भगवान शिव ने अपनी असीम करुणा से उस घातक विष को अपने कंठ में धारण कर लिया, लेकिन उसे पेट में नहीं उतरने दिया। माता पार्वती ने गले को थामकर विष को रोका, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। इस प्रकार महादेव ने जगत की रक्षा की और अमृत प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त किया।
महाराज जी ने सर्प को दुर्गुण (अहंकार, क्रोध, लोभ, माया आदि) का प्रतीक बताते हुए कहा कि सर्प मनुष्य को डसता और नष्ट करता है, किंतु भगवान शिव सर्पों को गले में धारण करते हैं—अर्थात वे सभी दुर्गुणों को नियंत्रित कर कल्याणकारी बनाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि यज्ञ जगत कल्याण के लिए होना चाहिए, विघ्न बाधा के लिए नहीं होना चाहिए। जैसे शिव ने विष पीकर सृष्टि बचाई, वैसे ही यज्ञ, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान स्वार्थ या द्वेष से नहीं, अपितु लोक मंगल, सुख-शांति और कल्याण हेतु होने चाहिए।
यह कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए, कई भक्तों की आंखें नम हो गईं और ‘हर हर महादेव’ के जयकारे से पूरा कथा स्थल गूंज उठा। महाराज जी ने उपदेश दिया कि जीवन में आने वाले विषम क्षणों (दुर्गुणों) को शिव भक्ति से नियंत्रित कर कल्याण का मार्ग अपनाना चाहिए।
यह दिवस शिव की त्याग-भावना, जगत कल्याण की महिमा और यज्ञ के सच्चे उद्देश्य का जीवंत स्मरण बन गया। ग्रामवासियों ने महादेव से प्रार्थना की कि वे सभी के दुर्गुणों को हरें, जीवन को अमृतमय बनाएं और यज्ञ-कर्मों को लोक कल्याणकारी बनने दें। कथा श्रृंखला भक्ति की अमृत वर्षा जारी रखेगी।

इस दिवस पर विशेष रूप से पूर्व गृह मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू जी, नव नियुक्त ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष देवेन्द्र देशमुख, नंद कुमार सेन (केश शिल्प बोर्ड अध्यक्ष), तथा टिकेश्वरी देशमुख जी ने कथा स्थल पर पधारकर पूरे मन से कथा का श्रवण किया। उनकी उपस्थिति से आयोजन में और अधिक गरिमा और उत्साह आया। कथा समापन पर श्री ताम्रध्वज साहू जी ने अपने आशीष वचनों में कहा, “शिव महापुराण की कथा सुनने के बाद केवल सुनना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसमें वर्णित गुणों का गुणना (गुण गान) और जीवन में आत्मसात करना अत्यंत आवश्यक है। शिव भक्ति को हृदय में बसाकर ही हम सच्चा कल्याण प्राप्त कर सकते हैं।” उनके ये प्रेरक शब्द सभी श्रोताओं के लिए मार्गदर्शक बने।








