- दुर्ग ग्रामीण मत्स्य घोटाला पार्ट-2: विभाग ने पहले छुपाया ‘कोई दस्तावेज नहीं’, अब निकले फर्जी पट्टे के काले कागज—ED और हाईकोर्ट की चौखट पर शिकायतकर्ता और मछुआरे
- फर्जी पट्टा, फर्जी निस्तार—विभाग ने खुद माना ‘कोई वैध लीज नहीं’, लेकिन जांच के नाम पर सिर्फ ‘कैजुअल लेटर’!
- तत्कालीन उपसंचालक और मत्स्य निरीक्षक अजीत गुप्ता की बंदरबांट उजागर; वर्तमान उपसंचालक के लेटर से सनसनी—बीजेपी नेता बचाव में जुटे, शिकायतकर्ता मानवाधिकार आयोग-ED-हाईकोर्ट जाने की चेतावनी!

दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत चिंगरी (दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र) में मत्स्य पालन के पांच तालाबों का घोटाला अब नए खुलासों के साथ और गहराता जा रहा है। कांग्रेस शासनकाल के आरंभ में 2018 में शुरू हुआ यह खेल, जहां नियम-कानूनों को ताक पर रखकर फर्जी पट्टा जारी किया गया, अब 2026 में पूरी तरह बेनकाब हो गया है। शिकायतकर्ता द्वारा 2024 से लगातार मांगी जा रही जानकारी आखिरकार सामने आई, जो साबित करती है कि मत्स्य पालन के लिए कोई वैध पट्टा/लीज ही जारी नहीं किया गया था! उप संचालक मत्स्य पालन विभाग, दुर्ग ने खुद एक पत्र जारी कर इसकी पुष्टि की, लेकिन जांच के नाम पर न शिकायतकर्ता को मौके पर बुलाया गया, न कोई जांच अधिकारी नियुक्त किया गया—बस एक ‘कैजुअल लेटर’ बनाकर कलेक्टर को भेज दिया और शिकायतकर्ता को सूचनार्थ कॉपी! यह लेटर अब पूरे मामले को उलट-पुलट कर रहा है, जहां तत्कालीन उपसंचालक और मत्स्य निरीक्षक अजीत गुप्ता की बंदरबांट साफ नजर आ रही है।

2024 से छुपाया गया सच 2026 में बाहर
शिकायतकर्ता ने RTI और शिकायतों के जरिए 2024 से ही विभाग से पट्टा, निस्तार प्रमाण-पत्र और जांच रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन हर बार टाला गया। वर्तमान उप संचालक के 26 दिसंबर 2024 के पत्र (क्रमांक 1135) से खुलासा हुआ कि विभाग के रिकॉर्ड में चिंगरी के पांच तालाबों के लिए कोई वैध लीज/पट्टा जारी होने का कोई दस्तावेज नहीं है! पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि “उक्त ग्राम पंचायत चिंगरी में मत्स्य पालन हेतु पट्टा/लीज जारी करने संबंधी कोई दस्तावेज नहीं मिला।” यह पत्र कलेक्टर दुर्ग को भेजा गया, लेकिन जांच प्रक्रिया में घोर लापरवाही बरती गई—न शिकायतकर्ता को साइट पर बुलाया, न कोई टीम भेजी। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यह ‘कैजुअल अप्रोच’ पुराने घोटाले को दबाने की कोशिश है, लेकिन उल्टा सच बाहर आ गया।

फर्जी निस्तार की जांच हुई, लेकिन पट्टा न होने का राज छुपाया
मामले का सबसे हास्यास्पद और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि विभाग ने फर्जी निस्तार प्रमाण-पत्र की शिकायत पर जांच तो की और प्रमाणित भी किया कि निस्तार गलत तरीके से जारी किया गया था, लेकिन यह बात जानबूझकर छुपाई गई कि इन तालाबों के लिए कोई वैध पट्टा ही नहीं है! 15 मई 2025 के सहायक मत्स्य अधिकारी के पत्र और विभाग के द्वारा मिली सूचना के अधिकार में कार्य में विस्तार से बताया गया कि तत्कालीन उप संचालक सुधा दास द्वारा जारी पत्र 2018 में स्पष्ट है कि सरपंच द्वारा जारी पट्टा नियम-विरुद्ध था, निस्तार प्रमाण-पत्र फर्जी था, और जांच में कई अनियमितताएं पाई गईं। लेकिन विभाग ने इस पर कार्रवाई के बजाय चुप्पी साध ली। अब 19 फरवरी 2026 के कलेक्टर दुर्ग के पत्र (क्रमांक 2195) में उप संचालक से पांच बिंदुओं पर जांच मांगी गई है—लीज अवधि, निस्तार प्रमाण-पत्र, शिकायत विवरण आदि। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह देरी से उठाया गया कदम है, जो पुराने दोषियों को बचाने की साजिश लगता है।

कांग्रेस शासन के आरंभ से शुरू, बीजेपी में जारी संरक्षण
यह घोटाला कांग्रेस के 2018 में शुरू हुआ, जब सरपंच ने हाईकोर्ट की अवमानना कर 7 वर्ष का फर्जी पट्टा जारी किया (नियम: 10 वर्ष)। मत्स्य निरीक्षक अजीत गुप्ता ने जांच रिपोर्ट दबा दी। अब बीजेपी शासन में मछुआ कल्याण बोर्ड के बड़े नेता संरक्षण दे रहे हैं—नाम बदलकर विभाग को गुमराह किया जा रहा है। वर्तमान उप संचालक का लेटर पुराने खेल को उजागर कर बैठा, लेकिन कार्रवाई की बजाय फाइलें अटकी हुई हैं।
शिकायतकर्ता की चेतावनी: ED, मानवाधिकार आयोग और हाईकोर्ट का दरवाजा
शिकायतकर्ता ने इस मामले को इंद्रावती भवन स्थित संचालनालय मत्स्य पालन तक पहुंचा दिया है। यदि 7 दिनों में कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED), छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग और उच्च न्यायालय बिलासपुर का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। शिकायतकर्ता ने कहा, “लाखों का सरकारी चूना लगाया गया, मछुआ समाज का हक छीना गया। अब सिस्टम की मिलीभगत बर्दाश्त नहीं—FIR, लाभ वसूली और दोषियों पर एक्शन जरूरी है, वरना जन-आंदोलन होगा।”
विभाग क्या करेगा?
मत्स्य पालन विभाग और जिला प्रशासन की चुप्पी जारी है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि राजनीतिक दबाव में मामला दबाया जा रहा है, लेकिन नए दस्तावेजों से घोटाला अब छुप नहीं सकता। क्या ED या कोर्ट हस्तक्षेप करेगा? स्थिति पर नजर बनी हुई है।








