
ग्राम पंचायत चिंगरी का एक ताजा मामला आज समाचार पत्र नई दुनिया में प्रकाशित हुआ इस मामले पर हमने अपने स्तर पर पड़ताल की तो मालूम हुआ कि गांव मे अवैध कब्जों को लेकर सबसे पहले शिकायत होती है जिस पर तहसील न्यायालय से पटवारी पंचनामा प्रस्तुत करने कहा जाता है जहां आरोपी ने पटवारी को लेटरहेड थमाया जिसमें लिखा था कि उक्त जगह से निर्माण में कोई आपत्ति नहीं… पंचनामा तैयार होने के बाद तहसील न्यायालय में प्रेषित किया जाता है तहसील न्यायालय में उस समय तात्कालिक तहसीलदार योगेंद्र वर्मा होते हैं और वह प्रकरण पर अपना आदेश देते हैं उक्त कब्जा को हटाया जाना उचित होगा पंचायती राज अधिनियम के तहत पंचायत को आदेश दिया गया कि आप इस पर कार्रवाई कर सकते हैं और उल्लेखनीय है कि आरोपी द्वारा जो लेटर पैड तहसील न्यायालय में जमा किया गया है वह अवैध है, फर्जी है भारतीय दंड संहिता तहत कानून में जुर्म दर्ज कर सकते हैं इस पर सचिव कुलेश्वर साहू ने अपने से राजनीतिक दांव पेंच खेल कर आरोपी को बचाता रहा.

तहसील न्यायालय से आदेश के बाद भी लीपापोती
फिर प्रार्थी खोमेन्द्र साहू ने पंचायत में आवेदन दिया कि मामले में फर्जीवाड़ा हुआ है, आदेश आया है उसमें कार्रवाई करिए तब जाकर सचिव ने एक पंचायत प्रस्ताव लिया फिर वहां से अंडा थाने में FIR के लिए आवेदन दिया जाता है यह घटना जनवरी 2023 की है प्राप्त जानकारी अनुसार इस मामले पर खोमेंद्र साहू कई बार थाने गया लेकिन पड़ताल में कुछ नहीं मिला थाने में यह कहा जाता था कि फर्जी एनओसी है, अनापत्ति प्रमाण पत्र है उसकी सत्यापित कॉपी या ओरिजिनल या डुप्लीकेट कॉपी मिलने पर कार्रवाई होगी हो इस पर कई बार खोमेंद्र साहू को ओरिजिनल मांगा गया लेकिन प्रार्थी खोमेंद्र साहू के पास ओरिजिनल कैसे हो सकता है जब इस मामले में सर्वप्रथम सरकारी कर्मचारी पटवारी के हाथ में आरोपी ने फर्जी लेटरहेड थमाया था, आरोपी के पास इसकी सत्यापित प्रतिलिपि मिलनी चाहिए थी लेकिन अनावेदक द्वारा थाना मे दिए गए बयान में ये एनओसी कहाँ से आया नहीं मालूम है लिखकर बयान दे दिया, अगर नहीं मालूम तो उस फर्जी कागज को पटवारी को क्यों थमाया, अनावेदक के घर के कागज है करके पटवारी को पेश किए हैं , अनावेदक को लगा था कि यह राज नहीं खुलेगा लेकिन उस कागज ने मामले को हाई प्रोफाइल बना दिया.
कब्जों के खेल में अवैध वसूली का शक
अब बात रही अवैध कब्जा हटाने की तो पंचायत में कई बार प्रस्ताव हुआ लेकिन सचिव की दरियादिली के कारण अभी तक कब्जा नहीं हटाया जा सका, पंचायत में कब्जा हटाने प्रस्ताव तो हुए कब्ज़ा हटाए जाने के लिए लेकिन उसे विधिवत तरीके से नोटिस कई बार दिए गए तीन चार बार नोटिस हो गया लेकिन अभी तक परिपालन नहीं किया गया बार-बार सीमांकन कराया जाता है गांव के लोगों के आंखों में धूल झोंका जाता है और इस तरीके की प्रक्रिया निरंतर चलती रही लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुआ. प्रार्थी खोमेंद्र साहू ने बताया कि तहसील न्यायालय, एसडीएम न्यायालय, और संभाग आयुक्त के पास हुए प्रकरण को वे जीत चुके हैं और मामले में कब्जा हटाने के फैसले को यथावत रखा गया है लेकिन अभी तक कब्जा नहीं हटाया गया है गांव में चर्चा का विषय है कि सचिव ने पैसे का भी लेनदेन कर लिया है.

मामले पर थाना अंडा कर रही है जनपद जिला के अधिकारियों के आदेश का इंतजार
अब इस मामले पर थाने में FIR की बात हुई उच्च अधिकारियों को जब इसके बारे में बताया गया तो इसके संबंध में बहुत सारी जांच प्रक्रिया हुई जिसमें पुलिस का यह कहना है कि जब तक जिला पंचायत या जनपद पंचायत इस पर आरोप सिद्ध नहीं करेगा तब तक हम कार्रवाई नहीं कर सकते इस बीच एक ओर जनपद में शिकायत हुई कि मामले में फर्जी लेटर पैड बनाने में सचिव की मिली भगत है इस संबंध में जांच हुई पड़ताल हुई तब पता चला कि अंडा खदान को उसी लेटरहेड से सिंचाई के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया था वह भी पूरा तरीके से अवैध था, बिना पंचायत प्रस्ताव के, बिना किसी शासकीय आदेश के पंचायत सचिव ने एनओसी जारी कर दिया अब प्रतिलिपि अर्थात उसकी ऑफिस कॉपी होती है वह पंचायत सचिव के पास नहीं है, न अंडा पंचायत मे वर्तमान में कोई सबूत या एनओसी की कॉपी मिली, उसे अभी तक ढूंढा जा रहा है, अब इस मामले पर जो आरोपी है संजय साहू उन्होंने अपना जुर्म कबूल माफ़ीनामा लिख लिया है और अब अनावेदक सचिव की जिम्मेदारी पूर्वक नौकरी बचा रहा है..

जिला पंचायत दुर्ग ने लिखी नई इबारत
सचिव का यह कहना है कि मैं व्यावहारिक तौर पर अंडा के किसी पंच को यह एनओसी दिया था इसका दुरुपयोग कैसे हुआ अनावेदक के पास यह कैसे पहुँचा पता नहीं.
कोई भी पंचायती राज के अधिकारी यह बता सकता है कि क्या किसी को व्यावहारिक तौर पर एनओसी दिया जा सकता है, नहीं. इसके लिए बाकायदा पंचायत प्रस्ताव किया जाना था उसके बाद एनओसी दिया जाना था वैसे भी यह एनओसी दूसरी पंचायत के नाम पर दिया जा रहा था तो यह और भी जरूरी हो जाता है कि इसका प्रस्ताव हो, अपने से सचिव ने होकर एनओसी दे दिया और उसकी दूसरी प्रति निकाल कर जालसाजी कर लिया गया इससे साफ पता चलता है कि सचिव इस मामले में शामिल है, यह गंभीर मामला सामने आने के बाद भी जिला पंचायत के मातहत अधिकारी बाज नहीं आ रहे हैं उनसे जब पूछा गया है कि अपने पंचायत सचिव के इस इन गलतियों पर क्या कार्रवाई की है तब वह जानकारी देने में झिझक रहे हैं ,पूर्व जांच का प्रतिवेदन दे दिया गया. उनसे पूछा गया कि आप इस मामले पर क्या कर रहे हैं तो उन्होंने अंडा थाना को जुर्म दर्ज करने कहा है अंडा थाना जुर्म दर्ज करेगा सो करेगा, उसके पहले आप क्या कार्रवाई कर रहे हैं तब जवाबदारी जिला पंचायत का शून्य हो जाता है, वह सचिव के खिलाफ कोई कार्रवाई ही नहीं करना चाह रहे हैं जिला पंचायत के मातहत अधिकारियों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है आपको बता दूं कि यहां जिला पंचायत में जब भी कोई शिकायत ग्राम पंचायत चिंगरी से की जाती है तो यहां के जो कर्मचारी हैं सीधे सचिव को जानकारी पहुंचा कर अपना कट ले लेते हैं जिस तरीके से जानकारी सामने आ रही है और इतने बड़े फर्जीवाड़ा को दबाने का प्रयास जिला पंचायत के अधिकारी कर रहे हैं यह बड़ी शर्म की बात है और इससे सुशासन से भरोसा उठ जाता है प्रशासनिक अफसर की मिली भगत के कारण अभी तक कार्रवाई नहीं हो पाई , जबकि तमाम सबूत साक्ष्य सामने मौजूद है जिसके कारण प्रार्थी खोमेन्द्र साहू अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा रहे हैं







