बालोद/डौंडी। महिला स्व सहायता समूहों को स्वरोजगार से जोड़ने और आजीविका गतिविधियां शुरू कराने के नाम पर लाखों रुपये की राशि लेने के बाद मशीन उपलब्ध नहीं कराने का मामला सामने आया है। ग्राम औराटोला की महिला स्व सहायता समूह की सदस्य लोकेश्वरी साहू द्वारा थाना डौंडी में दी गई शिकायत के अनुसार, खल्लारी निवासी खेमेन्द्र सेन ने दोना-पत्तल मशीन उपलब्ध कराने के नाम पर तीन महिला स्व सहायता समूहों से ₹3.39 लाख तथा ग्राम कामता की एक अन्य महिला से ₹50 हजार एडवांस राशि ली, लेकिन अब तक मशीन उपलब्ध नहीं कराई गई और राशि लौटाने में भी कथित तौर पर टालमटोल की जा रही है।
शिकायत के मुताबिक गांव के प्रेरणा स्व सहायता समूह, जय बुढादेव स्व सहायता समूह और जय मां स्व सहायता समूह की सदस्यों ने स्वरोजगार शुरू करने की योजना बनाई थी। इसी दौरान अक्टूबर 2025 में खेमेन्द्र सेन द्वारा गुणवत्ता वाली दोना-पत्तल मशीन और सामग्री उपलब्ध कराने की बात कही गई। प्रति मशीन एवं सामग्री की कीमत करीब ₹1.13 लाख बताए जाने के बाद तीनों समूहों ने बैंक ऑफ बड़ौदा, नर्राटोला शाखा से ऋण लेकर कुल ₹3.39 लाख की राशि जुटाई और 3 दिसंबर 2025 को आरोपी को राशि देने की बात शिकायत में कही गई है।

महिला समूहों का आरोप है कि राशि लेने के बाद भी मशीन नहीं दी गई। रकम वापस मांगने पर कथित तौर पर टालमटोल और अभद्र व्यवहार किया गया। इसी तरह ग्राम कामता की अटल महिला SHG की सदस्य हेमीन भुआर्य द्वारा स्वयं के लिए मशीन मंगाने के उद्देश्य से ₹50 हजार नकद देने का भी उल्लेख शिकायत में है।
मामले में पुलिस ने आवेदन की जांच के बाद प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध घटित होना पाए जाने पर अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की
पुराने मामले के तार जुड़ने का भी दावा
इधर स्थानीय स्तर पर की गई पड़ताल में यह जानकारी भी सामने आने का दावा किया जा रहा है कि ग्राम खल्लारी क्षेत्र में केंद्रीय श्रमिक कार्ड बनवाने के नाम पर कथित रूप से ₹70 हजार से अधिक की अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आई थीं। इस राशि को दुर्ग जिले के ग्राम अंडा निवासी बताए जा रहे झम्मन साहू तक पहुंचाए जाने की बात भी कही जा रही है। हालांकि इस पुराने मामले की जांच पूरी हुई है या नहीं और इसमें किसी व्यक्ति की भूमिका प्रमाणित हुई है या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।
इन दोनों मामलों के सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या महिला स्व सहायता समूहों से जुड़ा मामला किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है या फिर यह अलग-अलग घटनाएं हैं। पुलिस जांच में यदि पुराने श्रमिक कार्ड प्रकरण और वर्तमान दोना-पत्तल मशीन मामले के बीच कोई संबंध सामने आता है तो पूरे कथित नेटवर्क की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल पुलिस की विवेचना में दस्तावेज, बैंक लेन-देन, राशि देने के प्रमाण, मशीन खरीद से संबंधित रिकॉर्ड तथा संबंधित व्यक्तियों के बयानों की जांच से मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।







