
दुर्ग, 9 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के रिसाली नगर निगम में राजनीतिक ड्रामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में भाजपा ने गोविंद राम साहू को विधायक प्रतिनिधि नियुक्त किया है, जिसके जश्न में शहर भर में बैनर-पोस्टर लगाए गए हैं। लेकिन इन बैनरों में एक बड़ा ‘ट्विस्ट’ है – मैत्री नगर की पार्षद सुनंदा चंद्राकर की तस्वीर गायब है! जबकि कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए अन्य पार्षदों की फोटो चमक रही हैं। यह ‘फोटो गेम’ अब इलाके में गर्मागर्म चर्चाओं का केंद्र बन गया है, जहां लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं – क्या यह महज ‘चूक’ है या BJP के अंदरूनी खेमेबाजी की नई कहानी?
बैनरों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत भाजपा के शीर्ष नेताओं की तस्वीरें सजाई गई हैं, और नीचे रिसाली नगर निगम के पार्षदों की लाइन लगी है। गोविंद राम साहू को ‘नगर पालिक निगम रिसाली से विधायक प्रतिनिधि बनने पर बधाई’ दी जा रही है। लेकिन सुनंदा चंद्राकर, जो निर्दलीय चुनाव जीतकर आई थीं और महापौर पद के लिए भी नामांकन भरा था (हालांकि हार गईं), उनकी फोटो कहीं नजर नहीं आ रही। दिलचस्प बात यह है कि सुनंदा के पति दीपक ‘पप्पू’ चंद्राकर, जो सांसद प्रतिनिधि हैं, की तस्वीर तो बैनर में है – लेकिन वो भी थोड़ी ‘छोटी’ दिखाई गई है। इलाके के लोग कहते हैं, “यह पारिवारिक दखल न दिखाने का दिखावा तो नहीं?” वैसे लगभग 11 महीना बाद निगम चुनाव होना है महापौर का पद एससी आरक्षण होने के बाद कई सामान्य चेहरे ओझल हो गए हैं यह भी एक कारण हो सकता है.
सुनंदा चंद्राकर की राजनीतिक यात्रा भी कम मसालेदार नहीं। वे दुर्ग विधायक ललित चंद्राकर की सगी बहन हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान विभिन्न समाचार पोर्टलों के मुताबिक, सुनंदा और उनके पति पप्पू ने भाजपा जॉइन की थी। लेकिन अब बैनर से उनकी ‘अनुपस्थिति’ ने सवाल खड़े कर दिए हैं – क्या BJP में उनका स्वागत ‘दिल से’ नहीं हुआ? या फिर यह रिसाली नगर निगम में चल रही अंदरूनी सियासत का हिस्सा है?
मामले पर जब भाजपा मंडल अध्यक्ष राजू जंघेल से बात की गई, तो उन्होंने इसे ‘भूल-चूक’ करार दिया। उन्होंने कहा, “पार्षद सुनंदा चंद्राकर भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। पोस्टर में फोटो न होना एक त्रुटि हो सकती है।” लेकिन क्या यह इतनी साधारण ‘चूक’ है? खासकर जब कांग्रेस से तोड़े गए आधा दर्जन पार्षदों की फोटो बैनरों पर चमक रही हैं, और सुनंदा की नहीं। इलाके में अफवाहें उड़ रही हैं कि यह BJP के दो खेमों की लड़ाई का नतीजा है – एक तरफ विधायक परिवार, दूसरी तरफ नए शामिल सदस्य।
और ड्रामा यहीं नहीं रुकता! रिसाली नगर निगम में कांग्रेस की महापौर शशि सिन्हा अभी भी कुर्सी पर काबिज हैं। भाजपा ने कांग्रेस के पार्षदों को तोड़कर अपनी ताकत बढ़ाई जरूर, लेकिन उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। सवाल उठ रहे हैं – क्या BJP की यह ‘फोटो पॉलिटिक्स’ महज शुरुआत है, या नगर निगम में बड़ा उलटफेर होने वाला है? लोग कहते हैं, “पप्पू चंद्राकर की छोटी फोटो और सुनंदा की गायब तस्वीर – यह BJP के अंदर की ‘फैमिली ड्रामा’ को उजागर कर रही है!”
यह घटना दुर्ग की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रही है। क्या सुनंदा चंद्राकर की ‘गुमशुदा’ तस्वीर BJP के लिए मुसीबत बनेगी, या यह सिर्फ एक ‘पोस्टर वाली चूक’? आने वाले दिनों में देखना दिलचस्प होगा।








