
दुर्ग, 5 जनवरी 2026: रिसाली नगर निगम क्षेत्र के रुआबांधा में छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CGHB) द्वारा प्रस्तावित आवासीय कॉलोनी के निर्माण के खिलाफ स्थानीय निवासियों का आंदोलन आज और तेज हो गया। प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्र के एकमात्र बड़े खुले मैदान को बचाने की गुहार लगाते हुए शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया। बैनर-पोस्टर लिए लोगों ने नारे लगाए – “मैदान बचाओ, कंक्रीट जंगल नहीं चाहिए” और “विकास के नाम पर विनाश बंद करो”।
आंदोलन की जड़ और मांगें
रुआबांधा का यह मैदान लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए खेलकूद, व्यायाम, सामुदायिक कार्यक्रमों और बच्चों की मस्ती का केंद्र रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कॉलोनी निर्माण से यह खुला स्थान हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा, जिससे क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ेगा और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित होंगी। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने बड़ी तादाद में हिस्सा लिया। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “यह मैदान हमारी सांस है। इसे छीन लिया तो हम कहां जाएंगे?”
मुख्य मांगें:
मैदान को खेल ग्राउंड या ग्रीन पार्क के रूप में संरक्षित किया जाए।
हाउसिंग बोर्ड की योजना को किसी अन्य जगह शिफ्ट किया जाए।
विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन बनाया जाए।
विधायक ललित चंद्राकर और महापौर शशि सिन्हा की उदासीनता पर तीखे सवाल
यह क्षेत्र दुर्ग ग्रामीण विधानसभा के अंतर्गत आता है, जहां से भाजपा विधायक ललित चंद्राकर प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं, रिसाली नगर निगम की महापौर कांग्रेस की शशि सिन्हा हैं। प्रदर्शनकारियों ने दोनों की चुप्पी पर गुस्सा जताया। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “विधायक जी चुनाव में बड़े-बड़े वादे करते थे, लेकिन अब लोगों की मूल सुविधा पर खतरा है और वे गायब हैं। कोई बयान नहीं, कोई दौरा नहीं – यह उनकी असफलता है।”
महापौर शशि सिन्हा की ओर से भी इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लोगों का आरोप है कि निगम क्षेत्र होने के बावजूद महापौर ने स्थानीय सुविधाओं की रक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया। “महापौर जी को तो सबसे पहले आवाज उठानी चाहिए थी, लेकिन उनकी खामोशी बताती है कि वे लोगों की बजाय सरकारी योजनाओं को तरजीह दे रही हैं,” एक प्रदर्शनकारी ने कहा। दोनों नेताओं की उदासीनता से लोगों में निराशा है और वे इसे राजनीतिक लापरवाही बता रहे हैं।
बोर्ड और प्रशासन का पक्ष
छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड अटल विहार योजना के तहत सस्ते आवास प्रदान करने पर फोकस कर रहा है, जिसमें ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के फ्लैट शामिल हैं। बोर्ड का लक्ष्य शहरी गरीबों को घर उपलब्ध कराना है, लेकिन इस विशेष मामले पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई। प्रशासन ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखा और पुलिस तैनात की, लेकिन कोई टकराव नहीं हुआ।
आगे क्या?
यह आंदोलन विकास और संरक्षण के बीच बढ़ते टकराव को दिखाता है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। आने वाले दिनों में विधायक और महापौर का रुख क्या होगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। क्या प्रशासन दोनों पक्षों को सुनकर कोई वैकल्पिक हल निकालेगा?







