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53 लाख की सड़क पर 9 लाख का प्रयोग! अधूरी सड़क निर्माण पर उठे गंभीर सवाल, नागरिकों ने मांगी जांच

 

दुर्ग। राजीव नगर वार्ड क्रमांक 2 एवं 4 के मध्य स्थित मुख्य मार्ग के सड़क निर्माण को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया है कि लगभग 53 लाख रुपये की प्रस्तावित सड़क निर्माण योजना लंबित होने के बावजूद बिना समुचित स्वीकृति प्रक्रिया के करीब 9 लाख रुपये खर्च कर पतली सीसी सड़क का निर्माण कराया गया, जिसे अधूरा छोड़ दिया गया।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस मुख्य मार्ग का पूर्ण सीसी सड़क निर्माण प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, उसी मार्ग पर जल्दबाजी में सीमित राशि खर्च कर निर्माण कार्य शुरू किया गया और कुछ ही दूरी में सड़क बनाकर काम रोक दिया गया। इससे न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका पैदा हुई है, बल्कि भविष्य में प्रस्तावित 53 लाख रुपये की सड़क योजना पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

नागरिकों के अनुसार सड़क की मोटाई और गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं दिखाई देती। कई स्थानों पर सड़क संकरी और अधूरी है, जिससे बरसात के दौरान जलभराव एवं आवागमन की समस्या बनी रहेगी। लोगों का आरोप है कि यदि पूरी सड़क बननी ही थी तो फिर अधूरा निर्माण क्यों किया गया और यदि अस्थायी कार्य था तो इसकी प्रशासनिक अनुमति एवं तकनीकी स्वीकृति किस आधार पर दी गई।

मामले को लेकर क्षेत्रवासियों ने महापौर को ज्ञापन सौंपकर अधूरी सड़क का गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराने तथा पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि सरकारी राशि का उपयोग जनहित में होना चाहिए, न कि ऐसे कार्यों में जो कुछ समय बाद फिर से निर्माण की आवश्यकता पैदा कर दें।

क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि जब 53 लाख रुपये की सड़क का प्रस्ताव पहले से लंबित था, तब 9 लाख रुपये खर्च कर किए गए इस अधूरे निर्माण की आवश्यकता क्या थी। लोगों ने संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर जवाबदेही तय करने की मांग की है।

प्रमुख मांगें

9 लाख रुपये के निर्माण कार्य की तकनीकी एवं वित्तीय जांच।

सड़क निर्माण की स्वीकृति, प्राक्कलन और भुगतान दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।

अधूरी सड़क का मानक अनुसार पूर्ण निर्माण कराया जाए

दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए।

प्रस्तावित 53 लाख रुपये की सड़क योजना की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए।

जनता का सवाल:

“जब 53 लाख की सड़क प्रस्तावित थी, तो 9 लाख खर्च कर अधूरी सड़क बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? आखिर सरकारी धन का हिसाब कौन देगा?”

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Author: Dhaara News

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