देश : की सियासत के लिए आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। संसद का विशेष सत्र गुरुवार से शुरू हो रहा है, जिसमें केंद्र सरकार तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है। तीन दिन तक चलने वाले इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस की पूरी संभावना है।
सरकार की रणनीति: महिला आरक्षण को पूरी तरह लागू करना
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इन विधेयकों के जरिए महिला आरक्षण कानून को जमीन पर लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाना चाहती है। 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए यह पहल की जा रही है। साथ ही, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 तक करने की योजना भी चर्चा में है।
कौन पेश करेगा कौन सा बिल
आज पेश होने वाले तीनों विधेयकों में से एक को अमित शाह पेश करेंगे, जबकि बाकी दो विधेयक अर्जुन राम मेघवाल सदन के पटल पर रखेंगे। सरकार इन बिलों को प्राथमिकता के साथ पारित कराने की तैयारी में है।
ये हैं तीन बड़े विधेयक, जिन पर होगी चर्चा 1. केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026 इस प्रस्ताव के जरिए दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की योजना है। 2. संविधान संशोधन विधेयक 2026 इस विधेयक का फोकस बढ़ती आबादी के अनुरूप संसद में प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर है। इसके तहत लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ाने का रास्ता साफ किया जाएगा। 3. परिसीमन विधेयक 2026 इस बिल के माध्यम से लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण और विस्तार का प्रस्ताव है, जिससे नए जनसंख्या संतुलन के अनुसार प्रतिनिधित्व तय किया जा सके।
आगे क्या होगा, सबकी नजर विपक्ष पर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विपक्ष इन विधेयकों पर क्या रुख अपनाता है। बहस के दौरान संशोधन, विरोध या समर्थन—इन सभी संभावनाओं के बीच यह सत्र राजनीतिक रूप से बेहद निर्णायक साबित हो सकता है।
ये हैं तीन बड़े विधेयक, जिन पर होगी चर्चा 1. केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026 इस प्रस्ताव के जरिए दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की योजना है। 2. संविधान संशोधन विधेयक 2026 इस विधेयक का फोकस बढ़ती आबादी के अनुरूप संसद में प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर है। इसके तहत लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ाने का रास्ता साफ किया जाएगा। 3. परिसीमन विधेयक 2026 इस बिल के माध्यम से लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण और विस्तार का प्रस्ताव है, जिससे नए जनसंख्या संतुलन के अनुसार प्रतिनिधित्व तय किया जा सके।
आगे क्या होगा, सबकी नजर विपक्ष पर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विपक्ष इन विधेयकों पर क्या रुख अपनाता है। बहस के दौरान संशोधन, विरोध या समर्थन—इन सभी संभावनाओं के बीच यह सत्र राजनीतिक रूप से बेहद निर्णायक साबित हो सकता है।







