बिलासपुर : में सीतापुर विधानसभा चुनाव से जुड़े एक अहम मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। निर्वाचन अधिकारी द्वारा नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग पर भी नहीं मिली राहत
याचिकाकर्ता की ओर से न केवल नामांकन रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई थी, बल्कि पूरी चुनावी प्रक्रिया को रद्द करने की मांग भी की गई थी। हालांकि हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और याचिका को खारिज कर दिया।
क्या था पूरा मामला, नामांकन रद्द होने से शुरू हुआ विवाद
2023 विधानसभा चुनाव में सीतापुर सीट से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी मुन्ना लाल टोप्पो ने नामांकन दाखिल किया था। जांच के दौरान आपत्ति दर्ज हुई कि वह लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और जिला जल एवं स्वच्छता मिशन से जुड़े सरकारी अनुबंध में हैं, जिससे उन्हें लाभ के पद के आधार पर अयोग्य बताया गया।
31 अक्टूबर 2023 को रिटर्निंग ऑफिसर ने जांच के बाद उनका नामांकन रद्द कर दिया था।
याचिकाकर्ता का दावा, सरकार से अनुबंध नहीं था
मुन्ना लाल टोप्पो ने हाई कोर्ट में दलील दी कि उनका अनुबंध सरकार से नहीं बल्कि जिला जल एवं स्वच्छता मिशन से था, इसलिए नामांकन रद्द करना गलत है। इसी आधार पर उन्होंने पूरी चुनाव प्रक्रिया को चुनौती दी थी।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, खुद स्वीकार किया था अनुबंध
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने अपने नामांकन पत्र और शपथपत्र में स्वयं सरकारी अनुबंध की बात स्वीकार की थी। विभागीय रिपोर्ट में भी अनुबंध की पुष्टि हुई थी।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब उम्मीदवार खुद अनुबंध स्वीकार करता है, तो बाद में उससे मुकर नहीं सकता। स्वीकृति सबसे मजबूत साक्ष्य होती है।
निर्वाचन अधिकारी का फैसला सही ठहराया गया
हाई कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में असफल रहा कि उनका नामांकन गलत तरीके से रद्द किया गया था। इसी आधार पर कोर्ट ने निर्वाचन अधिकारी के फैसले को सही ठहराते हुए चुनाव याचिका खारिज कर दी।
सुनवाई और फैसला, सुरक्षित रखा गया था निर्णय
इस मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे 17 अप्रैल को सुनाया गया और याचिका को निरस्त कर दिया गया।







