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ख़बर जरा हटके: ईंट भट्टे की राबिश से चमके कुछ चेहरे, पंचायत का राजस्व जाए भाड़ मे…

 

दुर्ग जिले के कई ग्राम पंचायतों में इन दिनों ईंट भट्टों का कारोबार कुछ ज्यादा ही “गर्म” बताया जा रहा है। आरोप है कि कई भट्टे बिना आवश्यक एनओसी और अनुमति के ऐसे चल रहे हैं मानो सरकारी नियम-कानून केवल किताबों की शोभा बढ़ाने के लिए बनाए गए हों।
मामले का असली धुआं तब निकला जब एक पंचायत सचिव ने संबंधित ईंट भट्टा संचालक को नोटिस थमा दिया। नोटिस क्या गया, गांव में वर्षों से दबा हुआ “राबिश पुराण” ही खुल गया।
जानकारी के अनुसार पिछले पंचायत कार्यकाल में कुछ जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और उनके खास लोगों ने ईंट भट्टा मालिकों से हर साल 10 से 20 ट्रिप राबिश (ईंट का डस्ट) मुफ्त में डलवाया। बदले में पंचायत को मिलने वाला राजस्व भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, आरोप है कि बाद में पंचायत के खाते से हर वर्ष 15 से 20 हजार रुपये निकालकर ऐसे खर्च किए गए मानो गांव की सड़क नहीं बल्कि किसी फैशन शो की तैयारी चल रही हो।
गांव वालों का कहना है कि सरकारी राजस्व के नाम पर जो राशि बचनी चाहिए थी, उससे कुछ लोगों के कपड़े, जूते और सौ रुपये वाले फैशनेबल चश्मे जरूर चमक गए। अब गांव में चर्चा है कि राबिश सड़क पर कम और कुछ लोगों की जीवनशैली में ज्यादा बिछाई गई।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ईंट भट्टा संचालक को बड़े नेताओं और एक विधायक तक पहुंच के सपने दिखाकर अवैध उगाही की गई। वर्षों तक सब कुछ चलता रहा, लेकिन जैसे ही नोटिस आया, गांव के चौपाल से लेकर चाय की दुकानों तक “राबिश कांड” चर्चा का मुख्य विषय बन गया।
ग्रामीण मजाक में कह रहे हैं कि गांव में विकास कार्य भले कम हुए हों, लेकिन राबिश से रिश्ते और कुछ लोगों की कपड़े की आलमारी जरूर मजबूत हो गई। अब लोग मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि पता चल सके कि आखिर पंचायत का राजस्व विकास में गया या फिर किसी के जूते, कपड़े और चश्मे के बजट में।
फिलहाल गांव में एक ही चर्चा है—
“राबिश तो सड़क पर बिछनी थी, लेकिन लगता है कुछ लोगों की किस्मत पर बिछ गई!” :::

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Author: Dhaara News

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