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Part 4: दुर्ग ग्रामीण मत्स्य घोटाला। पंचायत विभाग की जांच पूरी, मत्स्य विभाग अब भी चुप—कार्रवाई से पहले क्यों थम गई फाइलें?

 

दुर्ग ग्रामीण के ग्राम पंचायत चिंगरी के बहुचर्चित मत्स्य पट्टा मामले में जनपद पंचायत दुर्ग की जांच ने कई गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और उसके पहले 12 जनवरी 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में शिकायतकर्ता गुलाब देशमुख द्वारा पंचायत एवं मत्स्य पालन—दोनों विभागों से जांच कराने की मांग की गई थी।

शिकायत के बाद जनपद पंचायत दुर्ग ने जांच पूरी कर 16 फरवरी 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। जांच अधिकारी आई.पी. नागदेव (वरिष्ठ आंतरिक लेखा परीक्षक) ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन सरपंच चंद्रभान बंजारे एवं तत्कालीन सचिव कुलेश्वर साहू की भूमिका को नियम-विरुद्ध बताते हुए दोनों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है।

जांच में क्या सामने आया?

 रिपोर्ट के अनुसार:

– 29 सितंबर 2018 को सक्षम प्राधिकारी (कलेक्टर) की अनुमति के बिना लगभग 9 हेक्टेयर क्षेत्र के पांच तालाबों का सात वर्ष के लिए पट्टा जारी किया गया।

– पट्टा उस समय दिया गया, जब मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया गया।

– बंधा तालाब को निस्तार हेतु सुरक्षित रखने का दावा जांच में पुष्ट नहीं हुआ।

– सहकारी समिति को मिलने वाली प्राथमिकता का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई।

– पट्टा राशि निर्धारण की प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्न उठाए गए, जिससे पंचायत एवं शासन को संभावित राजस्व हानि होने की बात रिपोर्ट में कही गई।

पंचायत की जांच पूरी, लेकिन मत्स्य विभाग अब भी मौन

जहां एक ओर जनपद पंचायत ने अपनी जांच पूरी कर जिम्मेदारी तय करने की अनुशंसा कर दी है, वहीं शिकायतकर्ता का आरोप है कि मत्स्य पालन विभाग आज तक केवल पत्राचार और फाइलों के आदान-प्रदान तक ही सीमित है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच के दौरान कई बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद विभाग अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि संबंधित तालाबों की वास्तविक लीज राशि कितनी थी, पंचायत को कितना भुगतान हुआ और उसका पूरा लेखा-जोखा क्या है। यही जानकारी शिकायतकर्ता को भी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

2018 में मत्स्य निरीक्षक को जारी हुए थे कई पत्र, अब कार्रवाई की बारी तो सन्नाटा?

शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2018 में मत्स्य निरीक्षक को उप संचालक द्वारा इस मामले में कई पत्र जारी किए गए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग इस पूरे प्रकरण से अनभिज्ञ नहीं था। लेकिन अब जब जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी है और जवाबदेही तय करने का समय आया है, तब विभाग की ओर से किसी भी संबंधित मत्स्य निरीक्षक या अन्य अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध न तो विभागीय कार्रवाई की गई है और न ही कोई अनुशासनात्मक कदम सार्वजनिक रूप से सामने आया है।

सबसे बड़ा सवाल

जनपद पंचायत की जांच में तत्कालीन सरपंच और सचिव पर कार्रवाई की अनुशंसा की जा चुकी है। ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या इस पूरे प्रकरण में केवल पंचायत स्तर पर ही जिम्मेदारी तय होगी, या फिर मत्स्य पालन विभाग के उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी, जिनकी निगरानी में वर्षों तक यह पट्टा संचालित होता रहा?

शिकायतकर्ता ने दी आगे की चेतावनी

शिकायतकर्ता गुलाब देशमुख का कहना है कि यदि जनपद पंचायत की जांच रिपोर्ट के बावजूद संबंधित विभाग कार्रवाई नहीं करता, तो वे मामले को उच्च स्तर पर उठाएंगे और उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा लेंगे।

अब पूरे मामले में जिला प्रशासन और मत्स्य पालन विभाग की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच रिपोर्ट में की गई अनुशंसाओं पर अमल होता है या मामला फिर लंबे समय तक केवल पत्राचार और फाइलों तक सीमित रह जाता है।

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Author: Dhaara News

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