जिसे चपरासी बनाने की बात कही थी, वही आज RTO की कुर्सी पर!
रिसाली।राजनीति में बयान कभी-कभी इतने लंबे समय तक पीछा करते हैं कि वक्त बदल जाता है, सरकार बदल जाती है, पद बदल जाते हैं… लेकिन पुरानी बातें वहीं खड़ी मिलती हैं।
रिसाली नगर निगम चुनाव की सरगर्मी के बीच भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास का वर्ष 2023 का एक पुराना बयान फिर चर्चा में आ सकता है। 28 अगस्त 2023 को रिसाली नगर निगम के घेराव के दौरान श्रीवास ने तत्कालीन निगम आयुक्त आशीष देवांगन सहित अधिकारियों को “चपरासी” बनाने की बात कही थी। उस समय यह बयान समाचारों में प्रमुखता से प्रकाशित हुआ था।
अब कहानी का दिलचस्प मोड़ देखिए।
वही आशीष देवांगन आज छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, रायपुर के पद पर दर्ज हैं।
यानी 2023 में जिस अधिकारी के लिए राजनीतिक मंच से “चपरासी” शब्द उछला था, वह आज प्रशासनिक व्यवस्था में RTO रायपुर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
तो सवाल उठना स्वाभाविक है—
क्या वह पुराना बयान सिर्फ चुनावी मंच का जोश था?
या फिर सत्ता में आने के बाद राजनीतिक नारों की भी पोस्टिंग बदल गई?
‘चपरासी बनाने’ का दावा, और पद निकला RTO का!
बीजेपी नेता गौरीशंकर श्रीवास लंबे समय से तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ आंदोलनों और मुद्दों को लेकर मुखर रहे। सीजीपीएससी से लेकर भारतमाला परियोजना के कथित मुआवजा अनियमितताओं जैसे मामलों में भी उनके बयानों और शिकायतों की खबरें सामने आती रही हैं।
लेकिन राजनीतिक व्यंग्य का असली सवाल यहीं से निकलता है—
जिसे कभी चपरासी बनाने का दावा किया गया था, वह आज RTO की कुर्सी पर है और जिस नेता ने यह दावा किया था, उन्हें लंबे इंतजार के बाद केश शिल्पी कल्याण बोर्ड की अध्यक्षता मिली है।
सियासत के गलियारों में इसे लेकर मजाकिया अंदाज में कहा जा सकता है—
“साहब को चपरासी बनना था, लेकिन फाइल घूमते-घूमते RTO की कुर्सी तक पहुंच गई… और श्रीवास जी की फाइल भी आखिरकार बोर्ड अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंच ही गई!”
रिसाली चुनाव में फिर गूंजेगा पुराना बयान?
रिसाली नगर निगम चुनाव के बीच यह पुराना बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि 2023 में यही निगम भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखे राजनीतिक संघर्ष का केंद्र रहा था।
अब भाजपा सत्ता में है और वही पुराने बयान देने वाले नेता सत्ता पक्ष के महत्वपूर्ण चेहरे हैं। ऐसे में रिसाली की जनता के बीच यह सवाल राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है कि—
“2023 में जो अधिकारी चपरासी बनने वाले थे, वे आज RTO हैं… आखिर सत्ता बदलने के बाद राजनीतिक समीकरण इतने बदल गए कि पुराना दावा ही उल्टा पड़ गया?”
यह खबर किसी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर आरोप नहीं लगाती, बल्कि 2023 के सार्वजनिक बयान और वर्तमान पद के बीच बने राजनीतिक विरोधाभास पर व्यंग्यात्मक सवाल खड़ा करती है।
क्योंकि राजनीति में कुर्सियां बदलती रहती हैं… लेकिन मंच से बोले गए शब्दों की फाइल कभी-कभी पांच साल बाद भी खुल जाती है।








