दावेदारों के कार्यालयों तक पहुंच रहे कथित बिचौलिए, व्हाट्सऐप और समाचार पत्रों में मनमाने नामों के प्रचार से बढ़ी परेशानी; CCTV फुटेज में मामला कैद होने की भी चर्चा
रिसाली। नगर निगम रिसाली में महापौर पद की दावेदारी को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने के बीच अब तथाकथित पत्रकारों और कथित बिचौलियों की गतिविधियों को लेकर भी चर्चाएं तेज होने लगी हैं। सूत्रों के हवाले से ऐसी चर्चाएं सामने आ रही हैं कि कुछ लोग चुनावी गतिविधियों के पल-पल के अपडेट और प्रचार-प्रसार के नाम पर दावेदारों से मोटी रकम की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और कथित रूप से रकम मांगने वाले व्यक्ति की पहचान भी फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है।
सूत्रों के अनुसार, महापौर पद के दावेदारों और उनके प्रतिनिधियों के कार्यालयों तक कुछ ऐसे लोग पहुंच रहे हैं, जिनकी गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा है कि चुनावी माहौल में खबरों के नियमित प्रसारण और प्रचार के नाम पर लाखों रुपये की मांग किए जाने की बातें भी सामने आ रही हैं। वहीं, कथित तौर पर छोटी रकम के भुगतान को लेकर भी घंटों इंतजार करने वाले खबरनवीसो की खूब चर्चा है।
व्हाट्सऐप से समाचार पत्रों तक, दावेदारों के नामों को लेकर असमंजस
महापौर पद की दावेदारी को लेकर एक और स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि कुछ नामों को कभी व्हाट्सऐप के माध्यम से संभावित दावेदार बताकर प्रसारित किया जा रहा है, तो कभी समाचार पत्रों में दावेदारी से जुड़ी खबरें प्रकाशित हो रही हैं। इससे कई वास्तविक दावेदारों और उनके समर्थकों के बीच असमंजस की स्थिति बनने की बात कही जा रही है।
राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर दावेदारी का वास्तविक आधार क्या है और क्या कुछ लोग अपने स्तर पर ही किसी को महापौर तो किसी को पार्षद का प्रबल दावेदार घोषित करने लगे हैं? हालांकि, किसी व्यक्ति की दावेदारी को लेकर प्रकाशित खबर अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन अपुष्ट जानकारी को तथ्य के रूप में पेश करना पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर सकता है।
50 हजार से एक लाख रुपये से अधिक की मांग का दावा
इस पूरे मामले में एक सूत्र ने दावा किया है कि महापौर पद की एक दावेदार के पति के कार्यालय में पहुंचकर कथित तौर पर 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये से अधिक की रकम मांगी गई। सूत्र के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम कार्यालय में लगे CCTV कैमरों में कैद होने की बात भी कही जा रही है। सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि कुछ तथाकथित खबरनवीस का घर इसी उगाही और वसूली से चल रहा है।
हालांकि, अभी तक न तो संबंधित CCTV फुटेज सार्वजनिक रूप से सामने आया है और न ही कथित रकम मांगने वाले व्यक्ति की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि हो पाई है। इसलिए इस आरोप को फिलहाल एक अपुष्ट दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। फुटेज सामने आने पर मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
चुनावी माहौल में पत्रकारिता की साख का सवाल
लोकतंत्र में पत्रकारिता की भूमिका जनता तक निष्पक्ष और प्रमाणित जानकारी पहुंचाने की है। चुनावी माहौल में दावेदारों की खबरें प्रकाशित करना या राजनीतिक गतिविधियों की जानकारी देना पत्रकारिता का हिस्सा है, लेकिन खबरों के बदले कथित रूप से अनुचित दबाव बनाने या रकम मांगने के आरोप गंभीर हैं। ऐसे मामलों में आरोपों की निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों की पुष्टि जरूरी है।
फिलहाल, रिसाली में कथित वसूली की इस चर्चा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, और ऐसे खबरियों की कभी भी वीडियो जारी होने की चर्चा है ।








