बिलासपुर : हाईकोर्ट ने निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों से जुड़े मामले में राज्य शासन के रवैये पर नाराजगी जताई है। शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी अदालत में पेश नहीं किए जाने पर कोर्ट ने शासन को अंतिम अवसर दिया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने 2 सितंबर 2026 को राज्य शासन को एक सप्ताह के भीतर पूरी जानकारी शपथ पत्र के साथ पेश करने का निर्देश दिया है।अदालत ने साफ कर दिया है कि तय समय में जवाब नहीं आया तो संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के सामने उपस्थित होना पड़ सकता है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
एक सप्ताह में जवाब नहीं आया तो होगी व्यक्तिगत पेशी
राज्य शासन को 12 अगस्त 2026 के आदेश के पालन में शिकायत पर हुई कार्रवाई का विवरण अदालत में प्रस्तुत करना था। लेकिन निर्धारित समय तक जानकारी पेश नहीं की जा सकी। इस पर हाईकोर्ट ने शासन को अब अंतिम मोहलत दी है।कोर्ट ने निर्देश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई की लिखित जानकारी शपथ पत्र के साथ दाखिल की जाए। ऐसा नहीं होने पर संबंधित अधिकारी को 29 सितंबर की सुनवाई में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होना होगा।याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने पक्ष रखा।
महिला योग टीचर ने लगाए हैं गंभीर आरोप
यह मामला बिलासपुर की एक महिला योग शिक्षिका की शिकायत से जुड़ा है। महिला ने आरोप लगाया है कि ऑनलाइन योग क्लास के दौरान आईपीएस रतनलाल डांगी ने उनके साथ कथित तौर पर अश्लील बातचीत की और वीडियो कॉल के दौरान आपत्तिजनक व्यवहार किया।शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी बात नहीं मानने पर उन्हें उनके सब इंस्पेक्टर पति को झूठे आपराधिक मामले में फंसाने और अत्यधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तबादला कराने की धमकी भी दी गई।महिला ने इन आरोपों से संबंधित साक्ष्यों के साथ 15 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन डीजीपी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद मार्च में रतनलाल डांगी को निलंबित किया गया था।
जांच अधिकारियों पर भी उठाए सवाल
शिकायत के बाद डीजीपी ने मामले की जांच के लिए तत्कालीन आईजीपी आनंद छाबड़ा और तत्कालीन डीआईजीपी मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी नियुक्त किया था।हालांकि, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि जांच अधिकारी निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करने के बजाय आरोपी अधिकारी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसी आधार पर महिला ने हाईकोर्ट का रुख किया और मामले की जांच किसी वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी से कराने की मांग की।
अब 29 सितंबर की सुनवाई पर रहेगी नजर
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब राज्य शासन के सामने कार्रवाई की पूरी जानकारी समय पर पेश करने की चुनौती है। यदि एक सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत पेशी का आदेश प्रभावी हो सकता है।फिलहाल अगली सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित है, जहां शासन की ओर से पेश की जाने वाली जानकारी के आधार पर मामले की आगे की दिशा तय होगी।





