दुर्ग/थनौद। जनपद पंचायत दुर्ग के ग्राम थनौद में आयोजित सुशासन त्योहार के दौरान सामुदायिक भवन भुगतान विवाद को लेकर हुए हंगामे के बाद मामला अब राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया में वायरल वीडियो के साथ-साथ राजस्व न्यायालय के आदेश और प्रकरण विवरण सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

जानकारी के अनुसार, भाजपा मंडल महामंत्री पुराण देशमुख द्वारा सामुदायिक भवन निर्माण को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। हालांकि अब सोशल मीडिया में वायरल हो रहे न्यायालयीन दस्तावेजों में यह उल्लेख किया जा रहा है कि संबंधित प्रकरण में जनवरी 2025 में ही स्थगन (स्टे) समाप्त हो चुका था। न्यायालयीन आदेश में यह भी उल्लेख है कि प्रकरण में आवेदक की ओर से कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसके बाद प्रकरण समाप्त कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, सुशासन त्योहार के दौरान विधायक ललित चंद्राकर के समक्ष यह बात रखी गई कि भवन निर्माण और भुगतान पर स्थगन प्रभावी है। जबकि वायरल दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि उस समय तक स्थगन हट चुका था। इसी वजह से अब पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि विवादित सामुदायिक भवन का निर्माण, तकनीकी मूल्यांकन और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद फरवरी 2026 में भुगतान किया गया था। वहीं संबंधित मामले में पूर्व सरपंच किरण देशमुख के विरुद्ध लगभग दो लाख रुपये की वसूली लंबित होने की बात भी प्रशासनिक स्तर पर सामने आई है। आरोप है कि यह वसूली कई वर्षों से लंबित है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि वायरल वीडियो और न्यायालयीन दस्तावेजों के सामने आने के बाद भाजपा संगठन इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से ले सकता है। पार्टी के भीतर अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाए जाने की स्थिति में मंडल महामंत्री पुराण देशमुख के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस संबंध में अभी तक संगठन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुशासन त्योहार के दौरान पुराण देशमुख और जनपद पंचायत CEO रूपेश पांडेय के बीच तीखी बहस हुई थी। इस दौरान ड्यूटी पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी के साथ बहस और दबाव बनाने के प्रयास के आरोप भी चर्चा में हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मामले में कोई आपत्ति थी तो उसे विधायक अथवा प्रशासन के समक्ष अलग से रखा जा सकता था, लेकिन सुशासन त्योहार जैसे जनसुनवाई कार्यक्रम में विवाद खड़ा होने से सरकार की सुशासन की अवधारणा और संगठन की अनुशासनात्मक छवि पर सवाल उठे हैं।
फिलहाल पूरे मामले पर सभी की निगाहें भाजपा संगठन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।







