दुर्ग। जनपद पंचायत दुर्ग द्वारा ग्राम थनौद में आयोजित सुशासन त्योहार के दौरान सामुदायिक भवन निर्माण और भुगतान को लेकर विवाद खुलकर सामने आ गया। कार्यक्रम में पूर्व सरपंच किरण देशमुख के पति पुराण देशमुख और जनपद पंचायत CEO रूपेश पांडेय के बीच तीखी बहस हुई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों में तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में यह दावा किया जा रहा है कि बीजेपी कार्यकर्ता अपनी समस्या लेकर विधायक ललित चंद्राकर के पास पहुंचे थे, जहां यह विवाद शुरू हुआ। हालांकि मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि सुशासन त्योहार जैसे जनसुनवाई कार्यक्रम में जनता की समस्याएं सुनने के बजाय राजनीतिक खींचतान और निजी विवाद हावी रहे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्तमान सरपंच और पूर्व सरपंच पक्ष के बीच लंबे समय से राजनीतिक रंजिश चली आ रही है। इसी के चलते सामुदायिक भवन निर्माण और भुगतान का मामला लगातार विवादों में बना हुआ है।

जनपद CEO रूपेश पांडेय ने बताया कि रुदा (खांड़ा) के पूर्व सरपंच किरण देशमुख पर लगभग ₹2 लाख की बकाया राशि लंबित है। आरोप है कि उक्त राशि की वसूली नहीं करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था, वहीं पहले से निर्मित सामुदायिक भवन के भुगतान को रोकने की मांग भी की जा रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भवन निर्माण से जुड़े मामले में लगाया गया स्टे करीब एक वर्ष पहले ही समाप्त हो चुका था, जिसके बाद नियमानुसार भुगतान किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अदम पैरवी के चलते संबंधित स्टे खारिज हुआ था।
विवाद के दौरान जनपद CEO रूपेश पांडेय ने यह भी कहा कि “पुराण देशमुख कोई जनप्रतिनिधि नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हैं। सुशासन तिहार किसी व्यक्ति या पार्टी विशेष के लिए आयोजित नहीं किया गया था।”
इधर पूरे मामले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। लोगों का कहना है कि यदि सुशासन त्योहार जैसे मंचों पर भी नेता और कार्यकर्ता निजी राजनीतिक मंसूबों को लेकर आमने-सामने होते रहेंगे, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा। कई लोगों ने इसे बीजेपी संगठन के अंदरूनी असंतोष और कार्यकर्ताओं की स्थिति से भी जोड़कर देखा है।
कार्यक्रम में मौजूद विधायक ललित चंद्राकर ने मामले पर सीधी प्रतिक्रिया देने से बचते हुए केवल इतना कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आपसी तालमेल बनाकर कार्य करना चाहिए।







