
मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान के अंतर्गत ग्राम तिरगा में निरीक्षण के लिए जनपद सदस्या दामिनी मुकेश साहू पहुंची उन्होंने बताया कि स्कूल में पढ़ाई के साथ साथ चल रही और भी सारी गतिविधियों के बारे में जानकारी ली साथ ही मध्यान भोजन शिक्षक की कमी के बारे में भी जानकारी लिया उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर और गुणवत्ता में सुधार के लिए चलाया जा रहा एक प्रमुख अभियान है, जिसके तहत सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit), स्कूलों की ग्रेडिंग, शिक्षकों को ट्रेनिंग, और अभिभावक-शिक्षक सहभागिता पर जोर दिया जाता है, ताकि छात्रों की सीखने की क्षमता और परीक्षा परिणामों में सुधार हो सके, और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ जीवन कौशल का विकास हो सके.
अभियान के मुख्य बिंदु:
सामाजिक अंकेक्षण: शिक्षा की गुणवत्ता की जांच के लिए स्कूलों में शाला प्रबंधन समिति, स्थानीय प्रतिनिधियों और समुदाय के सदस्यों की टीमें गठित की जाती हैं.
स्कूलों की ग्रेडिंग: छात्रों की उपलब्धियों और शिक्षक उपस्थिति के आधार पर स्कूलों को ग्रेड दिया जाता है.
शिक्षक प्रशिक्षण: शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और नई शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है.
अभिभावक-शिक्षक सहभागिता: पालकों और शाला विकास समितियों को सक्रिय कर बच्चों की शिक्षा में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाती है.
कमजोर छात्रों पर फोकस: कमजोर बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल समय में अतिरिक्त कक्षाएं और फोकस किया जाता है.
मॉडल स्कूलों का भ्रमण: निम्न ग्रेड वाले स्कूलों के शिक्षकों को बेहतर शिक्षण के लिए मॉडल स्कूलों में भ्रमण कराया जाता है.
स्थानीय भाषा में शिक्षा: स्थानीय भाषा (जैसे गोंडी) में शिक्षा देने के प्रयास किए जा रहे हैं. जिसका उद्देश्य है सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में समग्र सुधार लाना.
बच्चों के सीखने के स्तर और परीक्षा परिणामों को बेहतर बनाना.
शिक्षा प्रणाली को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाना.
उन्होंने कहा कि ये सब बहुत ही बढ़िया है लेकिन तभी जब इसका सही तरीके से क्रियान्वयन किया जाए , इस अवसर पर संकुल समन्वयक रघुनाथ देशमुख , प्राचार्य पुष्पा रामटेके एवं स्कूल के सभी स्टाफ और ग्रामीण जन उपस्थित रहे।








