दुर्ग ग्रामीण : लगता है दुर्ग जिले के उन माननीय ‘जनपद सदस्य’ महोदय का पिछला हफ्ता कुछ खास अच्छा नहीं बीता है। अभी शराब भट्ठी वाले कर्मचारी के ट्रांसफर वाले मामले में हुई किरकिरी की स्याही सूखी भी नहीं थी कि नेता जी का एक और ‘नया कारनामा’ मार्केट में आ गया है। इस बार निशाना बना है—एक स्थानीय नगर व्यवसायी।
किस्सा : “पुराना बकाया मांगना मना है”खबर है कि जनपद सदस्य महोदय एक व्यापारी की दुकान पर पहुंचे। लोग उम्मीद कर रहे थे कि शायद पुराना बकाया चुकाने आए होंगे, लेकिन यहाँ तो ‘रिवर्स गियर’ लग गया। जब व्यापारी ने अपनी मेहनत की पुरानी उधारी की याद दिलाई, तो नेता जी का ‘जनप्रतिनिधि’ वाला चोला उतर गया और ‘बाहुबली’ वाला मोड ऑन हो गया।
धमकी का नया ब्रांड: “धंधा बंद करा दूंगा”व्यापारी के साथ हुज्जतबाजी करते हुए नेता जी ने अपनी पुरानी घिसी-पिटी स्क्रिप्ट दोहराई— “जानते नहीं मैं कौन हूँ? इतना बड़ा नेता हूँ कि तुम्हारा काम-धंधा एक मिनट में बंद करा सकता हूँ।” अब कोई नेता जी को समझाए कि जनता काम चलाने के लिए चुनती है, बंद कराने के लिए नहीं। लेकिन सत्ता का नशा जब सिर चढ़कर बोलता है, तो ‘जनपद सदस्य’ खुद को ‘जिले का मालिक’ समझने की भूल कर ही बैठते हैं।
भट्ठी से लेकर दुकान तक… हार का सिलसिला ?
अभी दो दिन पहले ही भट्ठी कर्मचारी ने बड़े नेताओं के रसूख से इनकी ‘विधायक वाली धौंस’ को फेल किया था। उस हार के बाद नेता जी थोड़े शांत दिख रहे थे, पर अपनी ‘औकात’ की लगी चोट का गुस्सा उन्होंने बेचारे व्यापारी पर निकाल दिया।चर्चा का बाजार गर्मनगर के व्यवसायी अब दबी जुबान में पूछ रहे हैं— “ये नेता जी सेवा करने आए हैं या वसूली करने?” उधारी मांगो तो ‘धंधा बंद’ कराने की धमकी देना अब उनकी पहचान बनती जा रही है। इलाके के लोग भी मजे ले रहे हैं कि जो एक भट्ठी कर्मचारी का कुछ नहीं बिगाड़ पाए, वो अब दुकानदारों को डराकर अपना रसूख बचाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।
व्यंग्य बाण: जनपद सदस्य महोदय को शायद गलतफहमी हो गई है कि उनकी ‘धौंस’ की एक्सपायरी डेट खत्म नहीं हुई है। जिस तरह से वो अपनी किरकिरी करा रहे हैं, जल्द ही उनके ‘बड़े नेता’ होने के दावे पर लोग हंसने के अलावा और कुछ नहीं करेंगे।








