Diwali 2026: दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही घरों और बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 8 नवंबर को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। त्योहार की तैयारियों के बीच बाजारों में मिट्टी के दीपक, रंगोली, सजावटी सामान और पटाखों की खरीदारी भी शुरू हो गई है।दीपावली का नाम सुनते ही आंखों के सामने जगमगाते दीपकों की तस्वीर उभरने लगती है। सदियों से इस पर्व पर मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा चली आ रही है। सनातन धर्म में दीपक को शुभता, ज्ञान, सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है।हालांकि, मिट्टी के दीपकों का महत्व केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है। इनके साथ भारतीय लोककला, पारंपरिक कारीगरी, स्थानीय रोजगार और पर्यावरण जैसे कई पहलू भी जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि आधुनिक सजावट के दौर में भी मिट्टी के दीयों की अपनी अलग पहचान बनी हुई है। आइए जानते हैं दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने के पीछे छिपे धार्मिक और सांस्कृतिक कारण।
1. भारतीय लोककला और सदियों पुरानी परंपरा की पहचान हैं मिट्टी के दीये
2. अंधकार पर प्रकाश और निराशा पर उम्मीद की जीत का संदेश
3. कुम्हारों की आजीविका का मजबूत सहारा बनते हैं मिट्टी के दीये
4. पर्यावरण के लिहाज से कितने बेहतर हैं मिट्टी के दीये?
दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने का महत्व
मिट्टी का एक छोटा सा दीपक धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, पारंपरिक कला और सामाजिक सहयोग का भी संदेश देता है। इसे जलाकर हम न केवल अपने घर को रोशन करते हैं, बल्कि स्थानीय कारीगरों की मेहनत और उनकी विरासत को भी सम्मान देते हैं।इस दीपावली मिट्टी के दीये अपनाकर प्रकाश के इस पर्व को परंपरा, सकारात्मकता और स्वदेशी कारीगरी से जोड़ सकते हैं।








