कांग्रेस के 2018 में शुरू हुआ मत्स्य घोटाला अब बीजेपी के बड़े नेताओं के संरक्षण में!
दुर्ग ग्रामीण में करोड़ों का खेल बेनकाब—तत्कालीन सरपंच ने हाईकोर्ट की खुली अवमानना की, मत्स्य निरीक्षक अजीत गुप्ता ने जांच रिपोर्ट दबाई,
मछुआ कल्याण बोर्ड के बड़े नेता ने दिया राजनीतिक कवर—और विभाग की महिला अफसर पर गहरा संदेह

दुर्ग, 21 फरवरी 2026 – दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत चिंगरी (दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत) में मत्स्य पालन के पांच तालाबों का पट्टा घोटाला अब पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल रहा है। यह खेल कांग्रेस शासनकाल में 2018 में शुरू हुआ था, जब नियम-कायदों को ताक पर रखकर पट्टा जारी किया गया। अब बीजेपी के बड़े नेता और मछुआ कल्याण बोर्ड में पदस्थ प्रभावशाली नेता इस घोटाले को बचाने में जुटे हुए हैं— समुह का नाम बदलकर विभाग को गुमराह करने से लेकर फाइल अटकाने तक सब कुछ हो रहा है। मामले में इतने गंभीर आरोप हैं कि आने वाले दिनों में FIR दर्ज कराने की तैयारी है जिसमें बड़े विभाग के अफसर भी नपने वाले है।
कार्रवाई नहीं होने पर बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन और पूरे दुर्ग ग्रामीण में तीव्र जनआंदोलन की चेतावनी दी जा रही है।

मुख्य आरोप और तीनों की जिम्मेदारी:
तत्कालीन सरपंच ने कांग्रेस शासन में 29 सितंबर 2018 को माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर की खुली अवमानना करते हुए बिना कलेक्टर अनुमोदन के नियम-विरुद्ध मात्र 7 वर्ष का पट्टा जारी कर दिया (जबकि छत्तीसगढ़ मत्स्य पालन नीति के अनुसार 0-10 हेक्टेयर तालाबों के लिए 10 वर्ष की लीज अवधि निर्धारित है)।
तत्कालीन क्षेत्रीय प्रभारी मत्स्य निरीक्षक अजीत गुप्ता (अब सेवानिवृत्त) पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी उपसंचालक मत्स्य पालन दुर्ग के क्रमांक 232/उपस./तक./2018-19 दिनांक 03.10.2018 के पत्र में स्पष्ट रूप से 7 दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन अजीत गुप्ता ने इस पत्र को पूरी तरह दबा दिया। उनकी इस गंभीर निष्क्रियता ने घोटाले को आगे बढ़ने दिया।
मछुआ कल्याण बोर्ड में पदस्थ एक बड़े नेता (बीजेपी से जुड़े प्रभावशाली नेता) पर अवैध पट्टाधारक समूह को खुला राजनीतिक संरक्षण देने का गंभीर आरोप। इसी संरक्षण के बल पर समूह ने अपना नाम बदलकर दुर्ग कलेक्टर, उप पंजीयक सहकारिता और संचालक मत्स्य पालन विभाग को गुमराह करने का सफल खेल खेला। यही नहीं शासन की मछुवा नीति को भी गंभीर चोट पहुंचाया गया है प्रधानमंत्री की मत्स्य संपदा योजना सहित सहकारिता विभाग की पंजीयन प्रक्रिया से लेकर गांव में सहकार से समृद्धि योजना का भी मजाक और मखौल उड़ाया गया है।
फर्जी निस्तार प्रमाण-पत्र पट्टा जारी होने से मात्र 90 दिन पहले जारी किया गया, जो पूरी प्रक्रिया को अवैध साबित करता है। लाखों रुपये का अवैध लाभ उठाया गया, लेकिन शासन को एक पैसा भी राजस्व नहीं मिला।

नया ट्विस्ट—विभाग की महिला अफसर पर गहरा संदेह
12 जनवरी 2026 को विस्तृत शिकायत पत्र (सभी दस्तावेजों सहित) विभाग को सौंपे जाने के 40 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई जांच, कोई रिपोर्ट, कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय सूत्रों और शिकायतकर्ताओं में इस बात पर गहरा संदेह जताया जा रहा है कि मत्स्य पालन विभाग की एक महिला अधिकारी (जो इस मामले की जांच/कार्रवाई के लिए जिम्मेदार हैं) जानबूझकर फाइल को अटका रही हैं या राजनीतिक दबाव में चुप्पी साधे हुए हैं। यह सस्पेंस मामले को और भी गहरा बना रहा है—क्या विभाग के भीतर से ही घोटाले को बचाने की कोशिश हो रही है?
आरोप लगाने वाले पक्ष ने कहा,
“कांग्रेस के 2018 में शुरू हुआ यह घोटाला अब बीजेपी के बड़े नेताओं के संरक्षण में दबाई जा रही है। तत्कालीन सरपंच, मत्स्य निरीक्षक अजीत गुप्ता और मछुआ कल्याण बोर्ड के बड़े नेता सब मिलकर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं। विभाग की महिला अफसर पर भी संदेह गहरा है। यदि जल्द FIR दर्ज नहीं हुई, अवैध लाभ वसूला नहीं गया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा और पूरे दुर्ग ग्रामीण में तीव्र आंदोलन चलाकर जनता को जागृत किया जाएगा। मछुआ समाज और ग्रामीणों का हक छीना जा रहा है—यह अब व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक लड़ाई है।”
आगे क्या?
शिकायत की प्रतिलिपि संचालक मत्स्य पालन रायपुर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत दुर्ग और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। यदि विभागीय स्तर पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो विधानसभा स्तर पर जन-आंदोलन की तैयारी तेज हो रही है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि राजनीतिक दबाव और विभागीय चुप्पी के कारण फाइल अटकी हुई है, लेकिन जनता का गुस्सा अब उफान पर है।
यह मामला दुर्ग ग्रामीण विधानसभा में मत्स्य पालन योजनाओं की पारदर्शिता, जवाबदेही और सत्ताधारी-विपक्ष दोनों की मिलीभगत के गंभीर मुद्दे को उजागर कर रहा है। क्या विभाग अब जागेगा, या आंदोलन की नौबत आएगी? स्थिति पर सबकी नजर टिकी हुई है।







