दुर्ग। जिले में इन दिनों कुछ असामाजिक तत्व स्वयं को “एंटी करप्शन ब्यूरो”, “भ्रष्टाचार निरोधक विभाग” अथवा इसी प्रकार के नामों से जुड़े संगठन का अधिकारी बताकर विभिन्न शासकीय कार्यालयों में पहुंचने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि ऐसे लोग कथित पहचान पत्र (आईडी कार्ड) दिखाकर अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाव बनाने का प्रयास करते हैं।
सूत्रों के अनुसार, किसी विभाग से जुड़ी भ्रष्टाचार संबंधी खबर समाचार पत्रों, सोशल मीडिया अथवा अन्य माध्यमों में आने के बाद ऐसे तत्व संबंधित अधिकारी या कर्मचारी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। इस दौरान जांच या कार्रवाई का भय दिखाकर कथित रूप से अवैध वसूली अथवा समझौते का दबाव बनाने जैसी गतिविधियों की आशंका व्यक्त की जा रही है
जानकारों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को केवल आईडी कार्ड दिखाने के आधार पर अधिकृत अधिकारी नहीं माना जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को एंटी करप्शन विभाग या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पूछताछ, दबाव या धन की मांग करता है, तो उसकी पहचान, नियुक्ति और अधिकार की विधिवत पुष्टि की जानी चाहिए।
प्रशासन और पुलिस से मांग की गई है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए फर्जी पहचान पत्र बनाकर उगाही करने वाले गिरोहों की जांच कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी शासकीय विभागों को भी इस संबंध में सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तत्काल निकटतम पुलिस थाना या संबंधित सक्षम प्राधिकारी को देने के निर्देश जारी किए जाएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई का अधिकार केवल सक्षम और अधिकृत एजेंसियों को है। इसलिए किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के दबाव में आने के बजाय उसकी सूचना तत्काल पुलिस को देना ही सबसे सुरक्षित और कानूनी कदम है।








