दुर्ग (छत्तीसगढ़), 13 अप्रैल 2026 – ग्राम बोरीगारका के किसानों में भारी आक्रोश फैल गया है। लोक निर्माण विभाग द्वारा बोरीगारका-कातरो मार्ग पर सड़क निर्माण के दौरान लगभग 60 फीट चौड़ी सड़क पर ड्रेनेज पर पुल (कल्वर्ट) नहीं बनाया गया। सिर्फ पाइप डालकर सड़क बना दी गई, जिससे भविष्य में 1000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को फसल बोने और कटाई में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जनपद पंचायत दुर्ग के उपाध्यक्ष राकेश कुमार हिरवानी ने 10 अप्रैल 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (दुर्ग) को लिखे पत्र में इस गंभीर लापरवाही का जिक्र किया है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि किसानों ने 18 मार्च 2026 से 25 मार्च 2026 तक लगातार शिकायत की थी। लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने उच्च अधिकारियों से बात कर समस्या हल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन सड़क पूरा कर दी गई और पुल नहीं बनाया गया।
पत्र में आगे लिखा है:
“लोक निर्माण विभाग द्वारा लापरवाही व मनमानी तरीके से बिना सोचे-समझे भविष्य की परेशानियों को नजरअंदाज किया गया। इससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है।”
जल संसाधन विभाग ने भी 25 मार्च 2026 को लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखकर पुल निर्माण के लिए निर्देश दिए थे, लेकिन उसकी भी अनदेखी की गई।
किसानों की मांग और आंदोलन
किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग के जिलाध्यक्ष श्री राकेश ठाकुर के नेतृत्व में किसान 15 अप्रैल 2026 (बुधवार) सुबह 11 बजे लोक निर्माण विभाग कार्यालय का घेराव करेंगे। घेराव के बाद कार्यालय को जिला कलेक्टर को सौंपा जाएगा। किसानों का कहना है कि अगर तुरंत पुल निर्माण नहीं हुआ तो उनकी खेती-खादान और आजीविका दोनों खतरे में पड़ जाएंगी।
किसानों की पीड़ा
सड़क पर पुल न होने से पानी का बहाव रुक जाएगा।
1000 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि की सिंचाई प्रभावित।
फसल बोने, सिंचाई और कटाई में भारी दिक्कत।
बारिश के मौसम में पानी भराव की समस्या बढ़ सकती है।
जनपद पंचायत दुर्ग के उपाध्यक्ष राकेश कुमार हिरवानी ने सभी दस्तावेज संलग्न कर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासन से अपील
किसान संगठनों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग तुरंत पुल निर्माण का काम शुरू करे, ताकि किसानों की फसल और सिंचाई व्यवस्था बचाई जा सके। 15 अप्रैल का घेराव किसानों की मजबूरी है – उनकी आवाज सुनी जाए तो आंदोलन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।







