Dhaara News

Durg शिक्षा विशेष : भिलाई के निजी स्कूलों में वार्षिकोत्सवः ‘प्रतिभा दिखानी है तो पैसे दो’, पैसों के डर से पैरेंट्स ने खींचे हाथ, स्कूलों की मौज…

“प्रतिभा अभावों में पनपती है, पैसा उसका गला घोंटता है
स्टेज की चकाचौंध में खड़ा गरीब बच्चा, बस देखता रह जाता है”

18 नवंबर। भिलाई के अधिकांश निजी स्कूलों में इन दिनों वार्षिकोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं, कहीं समापन भी हो गया है लेकिन इन तैयारियों के बीच एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है –
क्या स्कूल में प्रतिभा दिखाने के लिए भी पैसा चाहिए?
शहर के कई प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में वार्षिकोत्सव में हिस्सा लेने के लिए छात्र-छात्राओं से अलग से ‘कंसेंट फॉर्म’ के नाम पर 500 से 1200 रुपये तक की वसूली की जा रही है। इस राशि में फैंसी ड्रेस, मेकअप, एक बार का नाश्ता और भोजन शामिल बताया जा रहा है। लेकिन सबसे दुखद यह है कि जिन बच्चों के पास इतने पैसे नहीं हैं, उन्हें स्टेज पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका ही नहीं दिया जा रहा।
आरटीई (राइट टू एजुकेशन) के तहत मुफ्त दाखिला लेने वाले गरीब परिवारों के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई अभिभावकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके बच्चे गायन, नृत्य और अभिनय में बहुत प्रतिभाशाली हैं, लेकिन स्कूल ने साफ कह दिया है – “पैसे नहीं दोगे तो परफॉर्म नहीं कर सकते।”
एक अभिभावक ने बताया, “मेरा बच्चा पिछले तीन साल से स्कूल के कल्चरल प्रोग्राम में पार्टिसिपेट कर रहा था। इस बार स्कूल ने 900 रुपये मांगे। हम इतने पैसे कहां से लाएं? अंत में बच्चे को मना करना पड़ा। वह रो-रोकर बुरा हाल है।”
नॉन-प्रॉफिट का ढोंग, मोटा प्रॉफिट
ये स्कूल सोसाइटी रजिस्ट्रेशन के तहत नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन के रूप में रजिस्टर्ड हैं, लेकिन वार्षिकोत्सव को मौका बनाकर खुलेआम कमाई की जा रही है। अभिभावकों का आरोप है कि 1000-1200 रुपये लेकर भी बच्चों को सस्ती ड्रेस दी जाती है, खाने की क्वालिटी खराब होती है और बाकी पैसा सीधा मैनेजमेंट की जेब में जाता है। जिन बच्चों के अभिभावक वार्षिक उत्सव में शामिल होते हैं उन्हें भी ढंग का नाश्ता का पैकेट भी नहीं मिलता है जबकि फैंसी ड्रेस मार्केट में ₹200 ₹300 पर उपलब्ध है. हर महीने भारी भरकम फीस वसूलने के बाद भी वार्षिकोत्सव में इस तरह से वसूली पर जिला शिक्षा अधिकारी की कोई नजर नहीं है कई जगह वे उल्टा गेस्ट बनकर नजर आ जाएं तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी.
शिक्षा का अधिकार या अमीरी का अधिकार?
आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों को सभी सुविधाएं मुफ्त मिलनी चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। प्रतिभाशाली बच्चे सिर्फ इसलिए स्टेज से दूर रखे जा रहे हैं क्योंकि उनके माता-पिता फीस नहीं भर सकते। अभिभावक इसे खुले तौर पर “प्रतिभा का दमन” बता रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है सभी बच्चों को बिना किसी भेदभाव के वार्षिकोत्सव में हिस्सा लेने का मौका दिया जाए। उनका कहना है कि वार्षिकोत्सव बच्चों की प्रतिभा निखारने का मंच है, इसे पैसा कमाने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।
फिलहाल सवाल यही है – भिलाई के इन महंगे स्कूलों में पढ़ाई मुफ्त में मिल सकती है आरटीई से, लेकिन अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए भी गरीब बच्चे को पैसे चुकाने पड़ेंगे?
यह मामला न सिर्फ भिलाई बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों की उस सच्चाई को उजागर करता है, जहां शिक्षा के नाम पर व्यापार खुलेआम हो रहा है।

dhaaranews
Author: dhaaranews

Leave a Comment